
Jharkhand: रांची स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर के प्रबंधन और संचालन को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड को निर्देश दिया कि वह मंदिर के संचालन और प्रबंधन को लेकर धारा 32 के तहत विस्तृत योजना तैयार कर अदालत में पेश करे। कोर्ट ने साफ कहा कि यह योजना पूरी तरह नियमों के अनुसार होनी चाहिए और मंदिर की व्यवस्था को बेहतर बनाने के सभी पहलुओं को शामिल किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को तय की गई है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहित शेखर रॉय ने अदालत को बताया कि मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए चौबीसों घंटे पुलिस बल की तैनाती की गई है और हाईकोर्ट के पहले के आदेशों का पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
वहीं धार्मिक न्यास बोर्ड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन और भारत कुमार ने पक्ष रखा, जबकि याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विपिन सिंह और रवि कुमार सिंह ने अपनी दलीलें पेश कीं।
पिछली सुनवाई में अदालत को बताया गया था कि मंदिर परिसर अपेक्षाकृत सुनसान इलाके में स्थित है और रात के समय सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा था कि कुछ समय पहले मंदिर के एक गार्ड की हत्या की जांच के दौरान कई अप्रिय घटनाएं सामने आई थीं, जिससे सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई थी।
इस पर हाईकोर्ट ने पहले ही रांची एसएसपी को निर्देश दिए थे कि मंदिर के अंदर और बाहर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए। अदालत ने कहा था कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर की संपत्ति की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
अब कोर्ट ने मामले को प्रशासनिक और प्रबंधन स्तर पर भी गंभीर मानते हुए धार्मिक न्यास बोर्ड से पूरी योजना मांगी है। कोर्ट के इस कदम से मंदिर की व्यवस्था में सुधार और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में आगे निर्णय होने की उम्मीद है।





