
Jharkhand: रांची। बोकारो जिले की 18 वर्षीय लापता युवती के मामले में मंगलवार को झारखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्रीय फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (सीएफएसएल), कोलकाता की विशेष रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश की गई। अदालत ने लिफाफा खोलकर रिपोर्ट का अवलोकन किया और मामले की अगली सुनवाई 25 जून को निर्धारित कर दी।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया (एएसजीआई) प्रशांत पल्लव ने पक्ष रखा। इससे पहले भी अदालत ने इस मामले की जांच में हो रही देरी और कथित लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई थी।
15 अप्रैल 2026 की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीशों की खंडपीठ ने बरामद नरकंकाल की पहचान और डीएनए जांच में देरी पर गंभीर सवाल उठाए थे। अदालत ने पूछा था कि अब तक डीएनए परीक्षण क्यों नहीं कराया गया और क्या पीड़िता के माता-पिता के सैंपल लेकर फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं या नहीं।
कोर्ट ने राज्य के तत्कालीन डीजीपी से भी सीधा जवाब मांगा था और कहा था कि कंकाल मिलने के कई दिन बाद भी वैज्ञानिक जांच शुरू न होना समझ से परे है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि क्या जांच एजेंसियां अदालत के आदेश का इंतजार कर रही हैं।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि बरामद नरकंकाल का पोस्टमार्टम कराया जाएगा और उसके बाद एफएसएल व डीएनए परीक्षण भी किया जाएगा। हालांकि, हाईकोर्ट इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखा था।
अदालत ने स्पष्ट कहा था कि ऐसे संवेदनशील मामलों में वैज्ञानिक जांच में देरी स्वीकार्य नहीं है और समय पर डीएनए व फॉरेंसिक जांच से ही सच्चाई सामने आ सकती है। इससे पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में मदद मिलेगी।
अब सीएफएसएल कोलकाता की रिपोर्ट पेश होने के बाद सभी की नजरें 25 जून की अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है।





