झारखंड

नेहरू ने पेंटिंग के कारण टाला था उद्घाटन

Saba Naaz
6 July 2026 6:22 PM IST
नेहरू ने पेंटिंग के कारण टाला था उद्घाटन
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बोकारो थर्मल पावर स्टेशन (BTPS-A) भारत के औद्योगिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है। झारखंड के बेरमो कोयलांचल में स्थित यह परियोजना 1952 में स्थापित हुई थी और इसे देश ही नहीं बल्कि एशिया का पहला बहुउद्देशीय पावर प्लांट बताया जाता है। इसका निर्माण अमेरिका और पश्चिम जर्मनी के सहयोग से हुआ था। इस ऐतिहासिक प्लांट का उद्घाटन 21 फरवरी 1953 को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था।

इस पावर स्टेशन से जुड़े कई किस्से आज भी लोगों के बीच चर्चा में रहते हैं। कहा जाता है कि उद्घाटन से पहले प्लांट की दीवारों पर बनाई जा रही विशेष वॉल पेंटिंग का काम पूरा नहीं हो पाया था। पेंटिंग को शांति निकेतन से जुड़े कलाकारों ने तैयार किया था। इसका लेआउट नंदलाल बोस ने बनाया था, जबकि इसे दीवारों पर सुरेंद्रनाथ कौर ने उकेरा था। इन चित्रों में उस समय के बिहार-झारखंड की संस्कृति को दर्शाया गया था। एक चित्र में “कर्म ही पूजा है” का संदेश था, जबकि “पंच सखी” नाम की पेंटिंग में जीवन के पंचतत्वों का प्रतीकात्मक चित्रण किया गया था। बताया जाता है कि नेहरू ने इस कला को देखने के लिए उद्घाटन की तारीख आगे बढ़ा दी थी।

नेहरू से जुड़ा एक और दिलचस्प प्रसंग डीवीसी गेस्ट हाउस का बताया जाता है। वहां काम करने वाले माली बोधी राम की लंबी दाढ़ी देखकर नेहरू ने कारण पूछा। माली ने बताया कि गांव में नाई समय पर नहीं आता, इसलिए शेव नहीं कर पाते। इस पर नेहरू भावुक हो गए और उन्होंने अपना कीमती अमेरिका निर्मित प्लेटिनम रेजर उन्हें उपहार में दे दिया।

उद्घाटन के दिन नेहरू ने किसी बड़े मंच की बजाय एक साधारण लकड़ी के स्टूल पर बैठकर मजदूरों और ग्रामीणों को संबोधित किया था। इस परियोजना में उस समय अमेरिकी कंपनी ‘आरएल कूक’ ने प्रमुख तकनीकी भूमिका निभाई थी। शुरुआती चरण में इस प्लांट की कुल क्षमता 172.5 मेगावाट थी, जिसमें तीन यूनिट शामिल थीं। बाद में 75 मेगावाट की एक और यूनिट जोड़ी गई। उस समय इसे तकनीकी रूप से काफी उन्नत माना जाता था, क्योंकि एक यूनिट बंद होने पर दूसरी से उत्पादन जारी रहता था।

हालांकि पर्यावरण मानकों को पूरा न करने के कारण 17 जुलाई 2000 को इस पुराने BTPS-A प्लांट को बंद कर दिया गया। इसके बाद उसी स्थान पर भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) की मदद से करीब 4000 करोड़ रुपये की लागत से 500 मेगावाट क्षमता का नया आधुनिक प्लांट स्थापित किया गया। यह नया संयंत्र 22 फरवरी 2017 से बिजली उत्पादन कर रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि पुराने ऐतिहासिक प्लांट को आज तक ध्वस्त नहीं किया गया है। यह इमारत आज भी उसी स्थान पर खड़ी है और स्वतंत्र भारत के शुरुआती औद्योगिक विकास तथा नेहरू युग की यादों को संजोए हुए है।

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