
रांची। भाकपा (माओवादी) संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य और 2.20 करोड़ रुपये के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा से पूछताछ में सुरक्षा एजेंसियों को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। प्रारंभिक पूछताछ में उसने स्वीकार किया है कि वह झारखंड के पारसनाथ क्षेत्र में माओवादी संगठन को दोबारा मजबूत करने की योजना पर काम कर रहा था। इस अभियान में उसका सहयोगी 15 लाख रुपये का इनामी माओवादी मेहनत उर्फ मोछू उर्फ विभीषण और एरिया कमेटी सदस्य गौरव उर्फ बिरेंद्र हांसदा उर्फ सौरम भी सक्रिय रूप से उसके साथ जुड़े हुए थे।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, बुधवार को हुई पूछताछ के दौरान मिसिर बेसरा ने संगठन की गतिविधियों और उसकी रणनीति से जुड़े कई अहम पहलुओं का खुलासा किया। उसने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में लगातार सुरक्षा अभियानों के कारण माओवादी संगठन को झारखंड के कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ है। इसके चलते संगठन का प्रभाव काफी कमजोर पड़ गया था। इसी स्थिति को बदलने के उद्देश्य से पारसनाथ और उसके आसपास के जंगलों में संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की योजना बनाई गई थी।
जांच एजेंसियों का मानना है कि पारसनाथ का दुर्गम और घना जंगल लंबे समय से माओवादी गतिविधियों के लिए संवेदनशील क्षेत्र माना जाता रहा है। इसी कारण संगठन यहां फिर से अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता था। पूछताछ में सामने आया कि इस योजना के तहत स्थानीय स्तर पर कैडर तैयार करने, पुराने सदस्यों से संपर्क स्थापित करने और संगठन के नेटवर्क को दोबारा सक्रिय करने की रणनीति बनाई गई थी।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि इस अभियान में 15 लाख रुपये के इनामी माओवादी मेहनत उर्फ मोछू उर्फ विभीषण की महत्वपूर्ण भूमिका थी। वह स्थानीय स्तर पर संगठन की गतिविधियों का समन्वय कर रहा था और नए सदस्यों को जोड़ने के प्रयासों में जुटा हुआ था। वहीं एरिया कमेटी सदस्य गौरव उर्फ बिरेंद्र हांसदा उर्फ सौरम को क्षेत्रीय नेटवर्क को मजबूत करने और संगठन के संदेश को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि हाल के वर्षों में लगातार चलाए गए अभियानों के कारण माओवादी संगठन की ताकत में काफी कमी आई है। कई शीर्ष कमांडर मारे गए या गिरफ्तार हुए हैं, जबकि अनेक सदस्यों ने आत्मसमर्पण भी किया है। ऐसे में संगठन अपने पुराने प्रभाव वाले इलाकों में दोबारा सक्रिय होने की कोशिश कर रहा था। पारसनाथ क्षेत्र को इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां मिसिर बेसरा से मिली जानकारी के आधार पर संगठन के अन्य सक्रिय सदस्यों, उनके संभावित ठिकानों और संपर्क सूत्रों की पहचान करने में जुटी हैं। पूछताछ से मिले इनपुट के आधार पर कई इलाकों में सुरक्षा बलों की निगरानी बढ़ा दी गई है। साथ ही संभावित ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाने की तैयारी भी की जा रही है।
अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में सामने आई जानकारियां माओवादी नेटवर्क को कमजोर करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि संगठन को आर्थिक और रसद संबंधी सहायता किन माध्यमों से मिल रही थी तथा किन इलाकों में उसके समर्थकों का नेटवर्क अब भी सक्रिय है।
पारसनाथ क्षेत्र झारखंड का एक महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थल होने के साथ-साथ घने जंगलों से घिरा इलाका भी है। अतीत में माओवादी संगठन ने इस क्षेत्र का इस्तेमाल अपनी गतिविधियों के लिए किया था। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों के कारण यहां माओवादी प्रभाव में उल्लेखनीय कमी आई है। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियां इस क्षेत्र को संवेदनशील मानते हुए लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी उग्रवादी संगठन के कमजोर पड़ने के बाद उसका दोबारा संगठित होने का प्रयास सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती होता है। ऐसे में खुफिया सूचनाओं का प्रभावी उपयोग, स्थानीय स्तर पर सतर्कता और निरंतर अभियान बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। मिसिर बेसरा से पूछताछ में मिले इनपुट इस दिशा में सुरक्षा बलों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां पूछताछ से मिली जानकारी का सत्यापन कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और इसके आधार पर आगे आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जिन लोगों या स्थानों का जिक्र पूछताछ में सामने आया है, उनकी भी जांच की जा रही है। एजेंसियों का उद्देश्य माओवादी संगठन की किसी भी संभावित पुनर्सक्रियता को समय रहते रोकना और क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखना है।





