भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग, रांची में छात्रों का विशाल प्रदर्शन

रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और लंबित मांगों को लेकर बुधवार को राजधानी रांची में हजारों अभ्यर्थी सड़कों पर उतर आए। राज्य के अलग-अलग जिलों से पहुंचे अभ्यर्थियों ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से संविधान यात्रा निकालकर अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा तथा जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम परिसर को दिल्ली के जंतर-मंतर की तर्ज पर स्थायी आंदोलन स्थल के रूप में विकसित करते हुए अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।
बुधवार शाम करीब चार बजे शुरू हुई संविधान यात्रा में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और अभ्यर्थियों ने भाग लिया। हाथों में संविधान की प्रतियां, तख्तियां और बैनर लिए प्रदर्शनकारियों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्ष चयन और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ नारे लगाए। यात्रा जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई आगे बढ़ी। पूरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना था कि पिछले कई वर्षों से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार विवाद सामने आते रहे हैं। कभी परीक्षा परिणामों पर सवाल उठते हैं तो कभी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर संदेह पैदा होता है। उनका आरोप है कि कई परीक्षाओं में अनियमितताओं की शिकायतों के बावजूद समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। अभ्यर्थियों ने कहा कि वे केवल निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया चाहते हैं, ताकि योग्य उम्मीदवारों को उनका अधिकार मिल सके।
आंदोलन में शामिल छात्रों ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध की नहीं, बल्कि अपने भविष्य और रोजगार के अधिकार की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह छात्र हितों को ध्यान में रखकर चलाया जा रहा है और इसे किसी भी प्रकार का राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। अभ्यर्थियों ने सभी संगठनों और राजनीतिक दलों से भी अपील की कि वे आंदोलन की भावना का सम्मान करें और इसे अपने हितों के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास न करें।
संविधान यात्रा के दौरान कई अभ्यर्थियों ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है तो आंदोलन अगले चरण में और अधिक व्यापक रूप लेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम को स्थायी धरना स्थल बनाया जाएगा, जहां अनिश्चितकालीन सत्याग्रह जारी रहेगा। उनका कहना था कि जब तक भर्ती प्रक्रिया में सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े सभी विवादित मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा भविष्य में ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुरक्षित हो। साथ ही आयोगों की कार्यप्रणाली में सुधार, समयबद्ध परीक्षा कैलेंडर, परिणामों की पारदर्शी घोषणा और अभ्यर्थियों की शिकायतों के त्वरित समाधान की भी मांग उठाई गई।
आंदोलन के दौरान कई स्थानों पर अभ्यर्थियों ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया। उनका कहना था कि संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अधिकार देता है और वे उसी अधिकार का प्रयोग करते हुए अपने भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
प्रशासन ने पूरे प्रदर्शन पर नजर बनाए रखी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखा। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। अधिकारियों ने अभ्यर्थियों से शांति बनाए रखने और कानून व्यवस्था का पालन करने की अपील की।
फिलहाल अभ्यर्थियों ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन लंबा चल सकता है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और संबंधित आयोगों की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार अभ्यर्थियों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान किस प्रकार किया जाता है।





