
बोकारो: सोमवार को हुई हल्की बारिश ने एक बार फिर बोकारो स्टील लिमिटेड (BSL) प्रबंधन के टाउनशिप ड्रेनेज दावों की पोल खोलकर रख दी है। जरा सी मानसूनी फुहारों के बाद ही बीएसएल क्षेत्र की प्रमुख सड़कों और रेलवे अंडरपास के नीचे घुटने भर पानी जमा हो गया। इस भारी जलजमाव के कारण पूरे इलाके में यातायात व्यवस्था चरमरा गई और लोगों को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्थिति को देखकर स्थानीय नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने बीएसएल प्रबंधन की ढुलमुल ड्रेनेज व्यवस्था (जल निकासी प्रणाली) पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सेक्टर-12 मोड़ और सीईजेड गेट के पास टापू जैसी स्थिति
बारिश के बाद बीएसएल टाउनशिप एरिया के प्रमुख सेक्टर-12 मोड़ पर तालाब जैसा नजारा देखने को मिला। वहीं दूसरी ओर, सबसे बदतर स्थिति बीएसएल के सीईजेड (CEZ) गेट के निकट स्थित रेलवे पुल के नीचे देखने को मिली। इस रेलवे अंडरपास के नीचे भारी मात्रा में वर्षा का पानी जमा हो गया, जिससे यह मार्ग पूरी तरह से जलमग्न हो गया। पुल के नीचे से गुजरने वाले कार, ट्रक, ऑटो और बाइक चालकों को गहरे पानी के बीच से जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ा। इस वजह से वाहनों की रफ्तार थम गई और सड़क पर काफी देर तक गाड़ियां रेंगती नजर आईं। कई दोपहिया वाहन चालक पानी के तेज बहाव में संतुलन खोते-खोते बचे।
वर्षों पुरानी समस्या से त्रस्त हैं स्थानीय नागरिक
इस समस्या को लेकर स्थानीय निवासियों में गहरा आक्रोश है। मामले पर बात करते हुए स्थानीय नागरिक इंद्रजीत कुमार, राजेश कुमार, रौनक कुमार और श्रवण झा समेत कई लोगों ने बताया कि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि सालों से हर मानसून में यही कहानी दोहराई जाती है। हल्की सी बारिश होते ही रेलवे पुल के नीचे भारी मात्रा में पानी जमा हो जाता है, जिससे यहां हमेशा किसी बड़ी सड़क दुर्घटना का खतरा बना रहता है। जलजमाव के कारण अक्सर छोटे वाहनों और बाइकों के इंजन में पानी घुस जाता है, जिससे गाड़ियां बीच रास्ते में ही बंद हो जाती हैं और किलोमीटर लंबा जाम लग जाता है।
नालियों की सफाई न होने से बढ़ी आफत; प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप
स्थानीय नागरिकों ने सीधे तौर पर बीएसएल प्रबंधन और नगर सेवा विभाग पर घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि टाउनशिप की नालियों की समय पर और नियमित सफाई नहीं की जाती है। कचरा फंसे होने के कारण जल निकासी पूरी तरह बाधित हो जाती है और सारा पानी सड़कों पर बैक मार जाता है। हर साल मानसून से पहले बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रबंधन द्वारा अब तक इस समस्या का कोई स्थायी तकनीकी समाधान नहीं निकाला गया है। क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों ने बीएसएल प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इस मानसून के दौरान जनता की परेशानी को गंभीरता से लिया जाए और रेलवे पुल के नीचे जल निकासी के लिए अतिरिक्त पंप या ड्रेनेज लाइन बिछाकर इसका स्थायी इलाज किया जाए, ताकि लोगों को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति मिल सके।





