झारखंड

झारखंड में 'काल' बना वज्रपात, 10 दिन में 50 से ज्यादा मौतें

Sarita
4 July 2022 9:22 AM IST
Kaal became a thunderstorm in Jharkhand, more than 50 deaths in 10 days
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फाइल फोटो 

झारखंड में वज्रपात से मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीते 10 दिनों में 50 से भी ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। झारखंड में वज्रपात से मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीते 10 दिनों में 50 से भी ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। आगे भी आसमान में बरसाती बादल जैसे-जैसे गहराएंगे, वज्रपात होगा, जिससे मौतों का आंकड़ा बढ़ने का अनुमान है। बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है, इस वजह से दक्षिण-पश्चिम मानसून आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 10 जुलाई तक राज्य के कई इलाकों में तेज बारिश के साथ वज्रपात के भी आसार हैं।

चूंकि राज्य में अभी खेतीबारी का समय है, बारिश होते ही किसान खेतों में कृषि कार्य में लग जाते हैं, ऐसे में उनपर वज्रपात का खतरा ज्यादा है। ऐसे में लोगों को वज्रपात से बचाने के लिए जागरूक करना जरूरी हो गया है। झारखंड में सिर्फ जागरुकता फैलाकर और मानसून आने के पहले वज्रपात से बचने के उपायों को अपनाने की जानकारी देकर सरकार ने इससे होनेवाली मौतें कम करने में सफलता पायी है। यह काम 2010 से लेकर 2015 तक सफलतापूर्वक हुआ।
2010 में वज्रपात से मरनेवालों की संख्या 236 तक पहुंच गयी थी, वहीं 2015 आते-आते घटकर 142 हो गयी। इसके बाद इस मामले में लापरवाही शुरू हो गई। सरकारी भवनों में लगाए गए तड़ित चालक जर्जर में हो गये। हर जिले में तैनात जिला आपदा प्रबंधन अधिकारियों के साथ राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने कोई समन्वय नहीं बनाया। वज्रपात की पूर्व सूचना देनेवाले मोबाइल एप का कोई उपयोग नहीं किया। लोगों को जागरूक करने के लिए कोई योजनाबद्ध काम नहीं किया गया। नतीजा यह रहा कि 2016 से वज्रपात से होनेवाली मौतें फिर बढ़ने लगीं। 2020-21 तक वज्रपात से एक बार फिर मौतों की संख्या बढ़कर 322 पहुंच गयी।
विशेषज्ञ बोले जागरुकता से बचाई जा सकती है जान
झारखंड सहित देश के कई राज्यों में वज्रपात से बचाव पर काम करने वाले विशेषज्ञ कर्नल संजय श्रीवास्तव का कहना है कि जागरुकता से ही लोगों की जानें बचायी जा सकती हैं। यह काम झारखंड में हो चुका है। झारखंड की टीम ने विशेष एप विकसित किया, जिसके माध्यम से वज्रपात के चार से छह घंटे पूर्व यह सूचना मिल जाती है कि किस इलाक में वज्रपात होगा। मौसम विभाग के पूर्वानुमान में भी इसका उल्लेख रहता है। लोगों को बताया जाता है कि जब बारिश और वज्रपात हो तो क्या करें, क्या न करें।
मानसून पूर्व की सारी तैयारी है बंद
मानसून आने के पहले सरकार की ओर से आपदा प्रबंधन विभाग तैयारियों को लेकर बैठक करता था। हर जिले के अधिकारी मौजूद रहते थे। किस जिले में कितने सरकारी भवनों में त़ड़ित चालक लगे हैं, कितने में लगाने हैं, कितने खराब पड़े हैं, इसकी समीक्षा होती थी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की मौसम पूर्वानुमान की जानकारी जिलों के माध्यम से ग्रामीणों और किसानों तक पहुंचाने की फौरी व्यवस्था बंद हो गयी। अखबारों और अन्य संचार माध्यमों से लोगों को वज्रपात से बचने के उपायों की जानकारी नहीं दी जा रही है। राज्य के 18 जिलों में आपदा प्रबंधन अधिकारी नहीं हैं। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग प्रभार में चल रहा है।
वज्रपात से बचाव के लिए ये करें
बाइक, बिजली या टेलीफोन का खंभा, तार की बाड़ और मशीन आदि से दूर रहें
तालाब और जलाशयों से दूर रहें
यदि आप पानी के भीतर हैं, अथवा किसी नाव में हैं तो तुरंत बाहर आ जाएं
यदि आकाशीय बिजली चमक रही है, आपके सिर के बाल खड़े हो जाएं और त्वचा में झुनझुनी होने लगे तो फौरन नीचे झुककर कान बंद कर लें
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