
Jharkhand झारखण्ड : दुमका के प्रसिद्ध सेल्फी ब्रिज क्षेत्र को अब पर्यटन के साथ-साथ रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने की दिशा में पहल शुरू की गई है। प्रशासन की योजना है कि इस इलाके में मत्स्यपालन को बढ़ावा देकर स्थानीय लोगों के लिए आय के नए स्रोत विकसित किए जाएं।
इस संबंध में दुमका के उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने मत्स्य विभाग को निर्देश दिया है कि सेल्फी ब्रिज के आसपास के क्षेत्रों में केज कल्चर (पिंजरा आधारित मत्स्यपालन) के माध्यम से मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए एक विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार किया जाए।
अधिकारियों के अनुसार, यह पहल पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। सेल्फी ब्रिज पहले से ही पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है, जहां बड़ी संख्या में लोग घूमने और फोटोग्राफी के लिए आते हैं। अब इस क्षेत्र को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।
मत्स्य विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह जल स्रोतों की उपलब्धता, पर्यावरणीय अनुकूलता और स्थानीय लोगों की भागीदारी को ध्यान में रखते हुए विस्तृत योजना तैयार करे। इसके तहत केज कल्चर तकनीक का उपयोग कर नियंत्रित वातावरण में मछली पालन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे उत्पादन भी बढ़ेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
प्रशासन का मानना है कि इस योजना से न केवल क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि पर्यटन गतिविधियों में भी विविधता आएगी। पर्यटक जहां एक ओर सेल्फी ब्रिज का आनंद लेंगे, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर विकसित हो रहे मत्स्यपालन मॉडल को भी देख सकेंगे।
मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक स्तर पर संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है और जल्द ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है।
स्थानीय लोगों ने इस पहल का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे युवाओं और मछुआरा समुदाय को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। लोगों का कहना है कि पर्यटन और मत्स्यपालन का यह संयोजन क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
फिलहाल, प्रशासन इस योजना को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है और उम्मीद है कि आने वाले समय में दुमका का यह क्षेत्र एक नए मॉडल के रूप में सामने आएगा, जहां पर्यटन और आजीविका दोनों साथ-साथ विकसित होंगे।





