
रांची : झारखंड सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में पारदर्शिता लाने और अपात्र लाभार्थियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के आपूर्ति विभाग ने रांची जिले के रातू प्रखंड में फर्जी और अपात्र राशन कार्डधारियों के खिलाफ व्यापक जांच अभियान चलाकर 115 लोगों पर करीब 3.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। विभाग ने सभी संबंधित लोगों को नोटिस जारी करते हुए निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पक्ष रखने और जुर्माने की राशि जमा करने का निर्देश दिया है।
आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई सरकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्र परिवारों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। जांच के दौरान पाया गया कि कई ऐसे लोग भी राशन कार्ड के माध्यम से सरकारी अनाज का लाभ ले रहे थे, जो निर्धारित पात्रता मानकों को पूरा नहीं करते थे।
विभाग की जांच में कुल 115 अपात्र राशन कार्डधारियों की पहचान की गई। इनमें से 45 लोगों की वार्षिक आय छह लाख रुपये से अधिक पाई गई। नियमानुसार इतनी आय वाले परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाले राशन के पात्र नहीं हैं। इसके बावजूद वे लंबे समय से सरकारी सब्सिडी वाले खाद्यान्न का लाभ उठा रहे थे।
इसके अलावा जांच में 70 ऐसे राशन कार्डधारियों का भी पता चला, जिनके पास चारपहिया वाहन हैं। विभाग का कहना है कि निर्धारित पात्रता मानकों के अनुसार इस श्रेणी के कई परिवार भी राशन योजना के लाभ के पात्र नहीं हैं। ऐसे मामलों में दस्तावेजों की जांच के बाद कार्रवाई की गई है।
आपूर्ति विभाग ने सभी संबंधित कार्डधारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में उन्हें निर्धारित समय के भीतर जवाब देने, आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने और यदि वे कार्रवाई से असहमत हैं तो अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमानुसार सुनवाई के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार, जिन लोगों पर जुर्माना लगाया गया है, उनसे निर्धारित समय के भीतर राशि जमा करने को कहा गया है। यदि कोई व्यक्ति समय सीमा के भीतर जवाब नहीं देता या जुर्माना जमा नहीं करता, तो उसके खिलाफ नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
राज्य सरकार लंबे समय से राशन कार्डों के सत्यापन और अपात्र लाभार्थियों की पहचान का अभियान चला रही है। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार द्वारा गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले खाद्यान्न का लाभ केवल वास्तविक पात्र लोगों को ही मिले। अपात्र लोगों के कारण कई बार वास्तविक जरूरतमंद परिवार योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं।
आपूर्ति विभाग का कहना है कि डिजिटल डाटाबेस, आय संबंधी अभिलेखों, वाहन पंजीकरण और अन्य सरकारी रिकॉर्ड का मिलान कर अपात्र लाभार्थियों की पहचान की जा रही है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से ऐसे मामलों का पता लगाना पहले की तुलना में अधिक आसान हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। साथ ही ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त संदेश जाएगा जो गलत जानकारी देकर सरकारी योजनाओं का अनुचित लाभ उठा रहे हैं।
विभाग ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति में सुधार हो गया है और वह राशन योजना की पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करता, तो वह स्वेच्छा से अपना राशन कार्ड सरेंडर कर दे। इससे जरूरतमंद परिवारों को योजना का लाभ मिल सकेगा और सरकारी व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।
सरकार का कहना है कि भविष्य में भी राज्यभर में इसी प्रकार का सत्यापन अभियान जारी रहेगा। विभिन्न जिलों में राशन कार्डधारियों के दस्तावेजों की जांच की जाएगी और पात्रता मानकों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर राशन कार्ड निरस्त करने, वसूली करने और अन्य कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।
रातू प्रखंड में की गई इस कार्रवाई को राज्य में अब तक की प्रमुख कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाना है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पात्र लाभार्थियों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है और केवल नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ ही कार्रवाई की जा रही है।
राज्य सरकार को उम्मीद है कि इस अभियान से सार्वजनिक वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। साथ ही सरकारी अनाज और सब्सिडी का लाभ वास्तविक गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। आने वाले समय में अन्य जिलों में भी इसी प्रकार की जांच और कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।





