झारखंड

झारखंड: मक्का MSP घोषित, खरीद नहीं होने से किसानों को नुकसान

Kavita2
25 Jun 2026 5:10 PM IST
झारखंड: मक्का MSP घोषित, खरीद नहीं होने से किसानों को नुकसान
x

Jharkhand झारखण्ड : केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-2027 के लिए सभी अनाजों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय कर दिया है। इसके तहत मक्का का MSP 2410 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जिसमें बोनस अलग से शामिल है। सरकार के इस फैसले के बावजूद झारखंड में मक्का किसानों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

झारखंड में धान और गेहूं को छोड़कर अन्य फसलों की सरकारी खरीद नहीं होने के कारण मक्का किसान अपनी उपज को खुले बाजार में बेचने को मजबूर हैं। वर्तमान में यहां किसानों को मक्का का दाम लगभग 1700 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है, जो निर्धारित MSP से काफी कम है। इससे किसानों को प्रति क्विंटल 400 से 700 रुपये तक का नुकसान हो रहा है।

किसानों का कहना है कि MSP घोषित होने के बावजूद सरकारी स्तर पर खरीद की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें बिचौलियों और व्यापारियों पर निर्भर रहना पड़ता है। व्यापारी मक्का को मशीन से मापकर उसकी कीमत तय करते हैं और फिर इसे ट्रैक्टर व ट्रक के जरिए बिहार के पीरपैंती रैक लोडिंग प्वाइंट तक पहुंचाया जाता है। वहीं कुछ व्यापारी इसे सड़क मार्ग से पश्चिम बंगाल भी भेजते हैं।

साहिबगंज जिले के गंगा तटीय क्षेत्रों में लगभग 4000 एकड़ में मक्का की खेती की जाती है। इस क्षेत्र में बड़ी मात्रा में उत्पादन होने के कारण किसान अपनी उपज को लंबे समय तक रोक नहीं पाते और तुरंत बिक्री के लिए मजबूर हो जाते हैं।

किसानों का कहना है कि जिले में अनाज भंडारण के लिए पर्याप्त गोदामों की सुविधा भी नहीं है। यदि भंडारण की व्यवस्था होती तो किसान अपनी उपज को कुछ समय तक सुरक्षित रखकर बेहतर कीमत मिलने पर बिक्री कर सकते थे। लेकिन गोदामों की कमी के कारण उन्हें तुरंत कम दाम पर फसल बेचनी पड़ती है।

स्थानीय किसानों का आरोप है कि MSP व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित रह गई है, क्योंकि जमीनी स्तर पर सरकारी खरीद नहीं होने से इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि यदि सरकार मक्का की खरीद भी धान और गेहूं की तरह शुरू करे तो उन्हें उचित मूल्य मिल सकता है और उनकी आय में सुधार हो सकता है।

किसान संगठनों ने भी इस मुद्दे को लेकर चिंता जताई है और सरकार से मांग की है कि मक्का की सरकारी खरीद की व्यवस्था तत्काल शुरू की जाए। उनका कहना है कि झारखंड जैसे राज्यों में जहां मक्का की अच्छी पैदावार होती है, वहां MSP का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब खरीद प्रणाली प्रभावी रूप से लागू की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कृषि उत्पादों के लिए मजबूत खरीद और भंडारण प्रणाली विकसित की जाए तो किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। वर्तमान स्थिति में बाजार पर निर्भरता के कारण किसान अस्थिर कीमतों का सामना कर रहे हैं।

फिलहाल, झारखंड के मक्का किसान सरकारी नीतियों और खरीद व्यवस्था में सुधार की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि उन्हें उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके और नुकसान से राहत मिल सके।

Next Story