झारखंड

Jharkhand : ब्रांडेड टैग लगाकर ग्राहकों को परोसते थे लोकल शराब, कैसे पकड़ी गई शराब फैक्ट्री

Sarita
26 March 2025 7:40 AM IST
Jharkhand :   ब्रांडेड टैग लगाकर ग्राहकों को परोसते थे लोकल शराब, कैसे पकड़ी गई शराब फैक्ट्री
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Jharkhand झारखंड: झारखंड के रांची के ओरमांझी थाना क्षेत्र के ओरमांझी ब्लॉक चौक के पास रेनोवो सेवन कॉलोनी में उस वक्त हड़कंप मच गया जब उत्पाद विभाग की टीम गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करने पहुंची. छापेमारी करने पहुंची उत्पाद विभाग की टीम वहां अवैध रूप से संचालित हो रही मिनी शराब फैक्ट्री के अंदर का नजारा देख हैरान रह गई. दरअसल रांची के ओरमांझी थाना क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित मिनी शराब फैक्ट्री में स्थानीय स्तर पर कई अलग-अलग ब्रांड की बोतलों में भरकर और उस पर ब्रांडेड शराब का स्टीकर लगाकर शराब बेची जा रही थी. साथ ही इस शराब को पड़ोसी राज्य बिहार भी भेजा जा रहा था. छापेमारी के दौरान आबकारी विभाग की टीम ने अवैध रूप से संचालित मिनी शराब फैक्ट्री के अंदर कई ब्रांडेड कंपनियों के रैपर, बोतल, स्टीकर के साथ ही रेनबो सेवन कॉलोनी में किराए के मकान में संचालित शराब फैक्ट्री से 250 पेटी सीलबंद विदेशी शराब, करीब 800 लीटर रंगीन शराब समेत करीब 200 बोरा खाली बोतल, शराब पैकिंग मशीन, कई ब्रांड के ढक्कन समेत अन्य उपकरण जब्त किए हैं।
चारों आरोपी बिहार के रहने वाले हैं आरोपी नकली शराब को असली दिखाने के लिए बोतलों पर झारखंड आबकारी विभाग का होलोग्राम लगाते थे। जब्त शराब की कीमत करीब 40 लाख रुपये आंकी गई है। इसके साथ ही छापेमारी टीम ने बिहार के औरंगाबाद जिले के रहने वाले शराब कारोबारी पंकज कुमार समेत उसके तीन अन्य साथियों को भी गिरफ्तार किया है। अभिषेक कुमार और आकाश कुमार दोनों बिहार के औरंगाबाद जिले के रहने वाले हैं।
आरोपियों द्वारा कार और कई अन्य वाहनों के जरिए अवैध रूप से संचालित मिनी शराब फैक्ट्री में महंगी ब्रांडेड कंपनियों की शराब बोतलों में भरने का काम किया जाता था और उसे ऊंचे दामों पर बिहार भेजने का काम किया जाता था। आबकारी विभाग की टीम की छापेमारी के दौरान यह भी पता चला कि आरोपियों ने कई कंपनियों की महंगी ब्रांडेड शराब की बोतलों के अंदर नकली शराब डालकर उसे दोबारा पैक कर दिया था।
100-150 रुपये का खर्च और 1700 रुपये की कीमत
आरोपी रंगीन पानी में स्प्रिट मिलाकर और नशीली दवाएं मिलाकर विदेशी शराब तैयार करते थे। जानकारी के अनुसार एक ब्रांडेड शराब की बोतल तैयार करने में 100 से 150 रुपये का खर्च आता था, जिसे ये लोग सप्लायर को लगभग दोगुनी कीमत पर देते थे। सप्लायर इन नकली शराब से भरी ब्रांडेड बोतलों को रांची समेत झारखंड के कई जिलों में 300 से 400 के बीच आसानी से 900 रुपये तक में बेच देते थे, जबकि बिहार पहुंचते-पहुंचते इन ब्रांडेड शराब की बोतलों की कीमत 1500 से 1700 रुपये प्रति बोतल हो जाती थी।
बिहार के रहने वाले चारों आरोपियों ने ऐसा सेटअप तैयार किया था कि आबकारी विभाग की टीम भी इसे देखकर दंग रह गई। मिनी शराब फैक्ट्री का खुलासा होने और चार लोगों की गिरफ्तारी के बाद अब उत्पाद विभाग की टीम इनसे जुड़े बाकी सप्लायरों और इस तरह के शराब कारोबार में संलिप्त आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुट गई है।
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