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Jharkhand झारखंड : झारखंड के चाईबासा और हजारीबाग में इन दिनों हाथियों का आतंक बढ़ गया है। लगातार हो रहे हमलों से ग्रामीण दहशत में जी रहे हैं। हालात को काबू में करने के लिए कर्नाटक से विशेष रूप से प्रशिक्षित छह कुनकी हाथियों को झारखंड बुलाया जा रहा है।
राज्य में बेकाबू हाथियों को नियंत्रित करने के लिए कर्नाटक से छह कुनकी हाथी भेजे जा रहे हैं। ये विशेष रूप से प्रशिक्षित हाथी होते हैं, जो जंगली और उग्र हाथियों को काबू में करने में मदद करते हैं। चाईबासा और हजारीबाग में पिछले एक महीने में 25 से अधिक लोगों की मौत हाथियों के हमले में हो चुकी है। चाईबासा में एक अकेले हाथी ने 15 से ज्यादा लोगों की जान ले ली, जबकि हजारीबाग में पांच हाथियों के झुंड ने एक ही रात में सात लोगों को मार डाला। अब उम्मीद है कि कुनकी हाथियों की मदद से इन बेकाबू हाथियों को जंगल की ओर वापस भेजा जाएगा और लोगों को राहत मिलेगी।
कुनकी (या कुमकी) शब्द फारसी भाषा से आया है, जिसका अर्थ होता है "सहायक"। कर्नाटक वन विभाग हाथियों को खास प्रशिक्षण देता है। इन प्रशिक्षित हाथियों के साथ अनुभवी महावत रहते हैं। ये हाथी शांत और अनुशासित होते हैं और इन्हें जंगली हाथियों को पकड़ने या नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। तमिलनाडु के कालेम और कर्नाटक के अभिमन्यु जैसे कुनकी हाथी कई अभियानों में सफल रहे हैं। ये हाथी अपनी गंध और व्यवहार से उग्र हाथियों को शांत करने में मदद करते हैं।
झारखंड में करीब 600 हाथी हैं, लेकिन जंगलों का क्षेत्र कम होने से उनके लिए भोजन और रहने की जगह घट गई है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में जंगल सिकुड़ रहे हैं। एक हाथी को रोज लगभग 17 घंटे तक भोजन करना पड़ता है, लेकिन जंगल में पर्याप्त भोजन नहीं मिल पा रहा है। इस वजह से हाथी गांव और खेतों की ओर आ रहे हैं, जहां उन्हें धान, सब्जियां और केला जैसी फसलें आसानी से मिल जाती हैं। खाने की तलाश और क्षेत्र को लेकर आपसी संघर्ष के कारण कई नर हाथी झुंड से अलग हो जाते हैं। ऐसे हाथी ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं और इंसानों पर हमला करने लगते हैं। राज्य सरकार और वन विभाग को उम्मीद है कि कुनकी हाथियों की मदद से हालात पर जल्द काबू पा लिया जाएगा और लोगों को हाथियों के डर से राहत मिलेगी।
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