झारखंड

झारखंड हाई कोर्ट की JSSC को फटकार, माध्यमिक आचार्य पुनर्परीक्षा मामले में मांगा विस्तृत जवाब

Gulabi Jagat
25 April 2026 4:40 PM IST
झारखंड हाई कोर्ट की JSSC को फटकार, माध्यमिक आचार्य पुनर्परीक्षा मामले में मांगा विस्तृत जवाब
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Jharkhand: रांची में झारखंड हाई कोर्ट ने माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा से जुड़े मामले में झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (Jharkhand Staff Selection Commission) के रवैये पर गंभीर नाराजगी जताई है। यह मामला पेपर-2 की पुनर्परीक्षा और 2819 अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देने के निर्देश से जुड़ा हुआ है।

शुक्रवार को जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने आयोग से कई अहम सवाल पूछे। कोर्ट ने पूछा कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में कंप्यूटर हैकिंग या बाहरी हस्तक्षेप की आशंका थी, तो इस मामले में एफआईआर दर्ज कर उच्च स्तरीय जांच क्यों नहीं कराई गई।

यह पूरा विवाद माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा के पेपर-2 की पुनर्परीक्षा को लेकर है। प्रार्थी अर्चना कुमारी सहित अन्य अभ्यर्थियों ने JSSC के 23 अप्रैल को जारी नोटिस को चुनौती दी है। इस नोटिस में 2819 अभ्यर्थियों को 8 मई को होने वाली पुनर्परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया गया था।

अभ्यर्थियों का कहना है कि बिना स्पष्ट कारण और जांच के सभी उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर करना गलत है। उनका तर्क है कि परीक्षा प्रक्रिया में यदि गड़बड़ी हुई भी है, तो केवल दोषी अभ्यर्थियों या केंद्रों की पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए थी, न कि सभी को एक साथ पुनर्परीक्षा में शामिल किया जाए।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा कि आयोग ने न तो परीक्षा केंद्रों पर मौजूद अधिकृत और अनधिकृत व्यक्तियों की पहचान की और न ही किसी स्तर पर जिम्मेदारी तय की। इसके बावजूद सभी अभ्यर्थियों पर पुनर्परीक्षा का दबाव बनाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने JSSC से स्पष्ट पूछा कि आखिर पूरे समूह की पुनर्परीक्षा क्यों जरूरी समझी गई, जबकि गड़बड़ी की स्थिति में दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जा सकती थी। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि अगर कंप्यूटर सिस्टम या परीक्षा प्रक्रिया में बाहरी हस्तक्षेप का संदेह था, तो इस पर तुरंत FIR दर्ज कर जांच क्यों नहीं शुरू की गई।

अदालत की इस सख्त टिप्पणी के बाद JSSC पर स्थिति स्पष्ट करने का दबाव बढ़ गया है। अब आयोग को अगली सुनवाई में सभी सवालों का विस्तृत जवाब देना होगा।

इस मामले में अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 27 अप्रैल तय की है। माना जा रहा है कि इस सुनवाई में आयोग को परीक्षा प्रक्रिया, पुनर्परीक्षा के कारणों और जांच से जुड़े सभी पहलुओं पर स्पष्ट स्थिति पेश करनी होगी।

अभ्यर्थियों का कहना है कि इस फैसले से हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं आयोग का पक्ष अब तक पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हुआ है।

यह मामला अब केवल परीक्षा विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया और निष्पक्षता के बड़े सवालों से जुड़ गया है। अदालत की सख्ती के बाद उम्मीद है कि अगली सुनवाई में स्थिति और स्पष्ट होगी।

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