झारखंड

फांसी की सजा पाने वाले व्यक्ति को झारखंड हाईकोर्ट ने किया बरी, जानें पूरा मामला

Sarita
19 May 2022 8:05 AM IST
Jharkhand High Court acquitted the person sentenced to death, know the whole matter
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फाइल फोटो 

झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि निचली अदालतों को अपराध के प्रकृति और उसकी भयावहता से प्रभावित नहीं होना चाहिए।

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि निचली अदालतों को अपराध के प्रकृति और उसकी भयावहता से प्रभावित नहीं होना चाहिए। अपराध कितना भी जघन्य क्यों न हो, लेकिन निष्कर्ष से पहले साक्ष्यों का विश्लेषण करना चाहिए। जस्टिस आर मुखोपाध्याय और जस्टिस संजय प्रसाद की अदालत ने कहा कि यह मामला भयानक और जघन्य है, लेकिन इसमें साक्ष्यों पर गौर नहीं किया गया।

इसके साथ ही अदालत ने छह साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या के आरोपी दुर्गा सोरेन को फांसी की सजा निरस्त कर उसे साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। मामले में वरीय अधिवक्ता एके कश्यप को हाईकोर्ट ने अमेक्स क्यूरी (अदालत को सहयोग करने वाला वकील) नियुक्त किया था।
सुनवाई के दौरान उन्होंने दलील दी कि इस मामले में न तो बाजार में चना बेचने वाले की गवाही दर्ज कराई गई और न ही वैसे लोगों की गवाही हुई, जिसने दोषी को पीड़िता के साथ देखा था। बच्ची के साथ रहने वाली दो बच्चियों के बयान में भी विरोधाभास है। वहीं न्याय मित्र की ओर से अदालत को बताया गया कि निचली अदालत ने परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर यह फैसला सुनाया है। परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर तभी किसी को सजा दी जा सकती है, जब केस की कड़ी एक-दूसरे से मिले। इस मामले में ऐसा नहीं है।
क्या है मामला
सरायकेला-खरसावां के राजनगर थाना क्षेत्र में नवंबर 2011 में छह साल की बच्ची की दुष्कर्म कर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पीड़िता के पिता ने दुर्गा सोरेन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस मामले में निचली अदालत ने 2016 में दुर्गा सोरेन को फांसी सजा सुनाई थी।
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