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Jharkhand झारखंड : झारखंड के धनबाद जिले के निरसा अनुमंडल क्षेत्र में पंचेत और गल्फरबाड़ी पुलिस चौकी (OP) के तहत आने वाले इलाकों में इन दिनों एक गंभीर सामाजिक समस्या सामने आई है। आदिवासी संस्कृति में पारंपरिक खेल मानी जाने वाली मुर्गा लड़ाई अब पूरी तरह से सट्टेबाजी के अवैध कारोबार में तब्दील हो चुकी है। स्थानीय पुलिस प्रशासन को इसकी पूरी जानकारी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है। इस अवैध गतिविधि के प्रमुख केंद्र कल्यांचक और दूधियापानी मैदान बन चुके हैं, जहां सप्ताह के सातों दिन दांव लगता है। ये अवैध धंधा न केवल कानून का उल्लंघन कर रहा है, बल्कि शराब, जुआ और हिंसक विवादों को बढ़ावा देकर मासूम आदिवासी युवाओं के भविष्य को भी दांव पर लगा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, पंचेत ओपी के कल्यांचक फुटबॉल ग्राउंड और गल्फरबाड़ी ओपी के दूधियापानी क्षेत्र में बंद भट्टे के पास इन अवैध मुर्गा लड़ाइयों का आयोजन किया जाता है। यहां हर लड़ाई में 3 से 5 हजार रुपए तक की बोली लगती है। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि रोजाना दो से तीन लाख रुपए तक की वसूली की जाती है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस अवैध खेल के संचालक पुलिस और कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों की मिलीभगत से ये बेखौफ कारोबार चला रहे हैं।
कई बार झगड़े और मारपीट की घटनाएं भी होती हैं, लेकिन थोड़ी देर बाद जुआ फिर से शुरू हो जाता है।ये पारंपरिक खेल अब जुए और सट्टे की जकड़ में आ चुका है। सुप्रीम कोर्ट और हैदराबाद हाईकोर्ट भी 2015 और 2016 में इस प्रतिबंध को बरकरार रख चुके हैं। इसके बावजूद, झारखंड के इन इलाकों में परंपरा की आड़ में कानून का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।
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