देवघर सदर Hospital में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित, सुविधाओं पर उठे सवाल

Jharkhand: झारखंड सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने का दावा करती है, लेकिन देवघर जिले के सदर अस्पताल में जमीनी स्थिति अलग नजर आती है। देवघर न केवल जिले का मुख्य अस्पताल है, बल्कि दुमका, गोड्डा, पाकुर, साहिबगंज और जमताड़ा जैसे आसपास के जिलों के मरीज भी यहां इलाज के लिए आते हैं।
हालांकि, यहां मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। वर्ष 2025 में शुरू की गई गहन चिकित्सा सेवा (ICU आधारित विशेषज्ञ परामर्श) कुछ ही महीनों में बंद हो गई। शुरुआत में विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा गंभीर मरीजों को निशुल्क सलाह दी जाती थी, लेकिन बाद में डॉक्टरों ने सेवाएं देना बंद कर दिया, जिससे यह व्यवस्था ठप हो गई। इसके अलावा CSR फंड से लगाई गई एक्स-रे मशीन और अल्ट्रासाउंड मशीन भी पूरी तरह से चालू नहीं हो पाई हैं। मरीजों का कहना है कि जांच सुविधा ठीक से नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी लैब में महंगे दाम पर जांच करानी पड़ रही है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार कुछ डॉक्टरों को दिहाड़ी आधार पर रखा गया था, जिस कारण उन्होंने काम करने से मना कर दिया। वहीं मशीनों के संचालन में कुछ तकनीकी और कागजी प्रक्रिया बाकी है, जिसे पूरा किया जा रहा है। अस्पताल की उप अधीक्षक डॉक्टर सुषमा वर्मा ने कहा कि CSR फंड से प्राप्त मशीनों को जल्द ही पूरी तरह से चालू कर दिया जाएगा। इस स्थिति के बीच सवाल उठ रहा है कि जब सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा कर रही है, तो देवघर सदर अस्पताल में मरीजों को बुनियादी जांच और इलाज की सुविधाएं क्यों नहीं मिल पा रही हैं।





