
Jharkhand: गढ़वा जिले में सरस्वती नदी के पुनर्जीवन और संरक्षण अभियान को एक बार फिर गति देने की तैयारी शुरू हो गई है। जिला उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने मानसून से पहले नदी की व्यापक सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का उद्देश्य नदी संरक्षण के साथ-साथ भू-जल स्तर में सुधार और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करना है।
जिले में मेराल प्रखंड से लेकर गढ़वा तक बहने वाली सरस्वती नदी के कई हिस्सों में गाद और कचरे की समस्या बनी हुई है। इसी को देखते हुए नगर परिषद के माध्यम से नदी के पूरे प्रवाह क्षेत्र की सफाई कराई जाएगी। प्रशासन ने उन स्थानों पर विशेष ध्यान देने को कहा है जहां जल प्रवाह बाधित हो रहा है या कचरे के कारण नदी की स्थिति खराब हो रही है। अधिकारियों का मानना है कि समय पर सफाई से वर्षा जल संचयन बेहतर होगा और भू-जल स्तर में सुधार आएगा।
सरस्वती नदी के पुनरुद्धार के लिए इसी वर्ष 25 मई को ‘आपन सरस्तवीया’ अभियान की शुरुआत की गई थी, जिसमें स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में श्रमदान किया था। शुरुआती चरण में इस अभियान को अच्छी सफलता मिली थी, लेकिन बाद में प्रशासनिक बदलाव के कारण कार्य की गति धीमी पड़ गई थी। अब जिला उपायुक्त ने स्वयं इस अभियान की कमान संभालते हुए इसे फिर से सक्रिय करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अनुमंडल पदाधिकारी और संबंधित विभागों को समन्वय बनाकर सफाई कार्य तेज करने को कहा है। नदी के उस क्षेत्र तक विशेष सफाई अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं जहां सरस्वती नदी दानरो नदी में मिलती है।
प्रशासन ने इस अभियान में केवल सरकारी तंत्र पर निर्भर न रहते हुए सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से भी सक्रिय सहयोग की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि जनभागीदारी के बिना नदी संरक्षण का लक्ष्य पूरा नहीं किया जा सकता। उपायुक्त ने कहा कि नदियां किसी भी क्षेत्र की जीवनरेखा होती हैं और इनके संरक्षण से ही पर्यावरण और जल संसाधन सुरक्षित रह सकते हैं। उन्होंने लोगों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है ताकि सरस्वती और दानरो नदी को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाया जा सके।





