
Jharkhand झारखण्ड : जनगणना और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के एक बड़े मामले का खुलासा होने से प्रशासन में हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मुफस्सिल थाना पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है, जो लंबे समय से फर्जी दस्तावेज तैयार करने और लोगों से ठगी करने में शामिल था।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान हिरणपुर थाना क्षेत्र के बागशीशा गांव निवासी हेमंत कुमार साहा के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले करीब एक वर्ष से फर्जी प्रमाण पत्र बनाने का काम कर रहा था और इसके लिए उसने एक संगठित तरीके से लोगों को झांसे में लिया।
पुलिस के अनुसार, हेमंत कुमार साहा ने सरकारी दस्तावेज तैयार करने के नाम पर एक फर्जी ऑनलाइन सिस्टम तैयार किया था। सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि आरोपी ने सरकार की आधिकारिक वेबसाइट dc.crsorgi.gov.in का क्लोन बनाकर एक नकली वेबसाइट तैयार की थी। इसी फर्जी वेबसाइट के जरिए वह ग्रामीणों को सरकारी प्रमाण पत्र बनाने का भरोसा दिलाता था और उनसे पैसे वसूलता था।
ग्रामीणों को लगता था कि वे असली सरकारी पोर्टल पर आवेदन कर रहे हैं, जबकि वास्तव में वे एक फर्जी प्लेटफॉर्म पर अपनी जानकारी दे रहे थे। आरोपी इस प्रक्रिया के बाद उन्हें नकली सरकारी दस्तावेज उपलब्ध कराता था, जिससे वे आसानी से ठगी का शिकार हो जाते थे।
मामले का खुलासा तब हुआ जब कुछ ग्रामीणों को दिए गए प्रमाण पत्रों पर संदेह हुआ और उन्होंने इसकी शिकायत स्थानीय प्रशासन से की। शिकायत मिलने के बाद मुफस्सिल थाना पुलिस ने जांच शुरू की और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हेमंत कुमार साहा को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी एक सुनियोजित तरीके से फर्जी वेबसाइट और दस्तावेजों का उपयोग कर रहा था। उसके पास से कुछ डिजिटल उपकरण और संदिग्ध दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
इस घटना के सामने आने के बाद प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के सरकारी प्रमाण पत्र या दस्तावेज केवल अधिकृत पोर्टल और सरकारी केंद्रों से ही बनवाएं। साथ ही यह भी कहा गया है कि किसी भी संदिग्ध वेबसाइट या व्यक्ति से सावधान रहें, जो सरकारी सेवाओं के नाम पर पैसे की मांग करता हो।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी के इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और उसने कितने लोगों को फर्जी दस्तावेज जारी किए हैं। मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश भी की जा रही है।
कुल मिलाकर, इस फर्जी प्रमाण पत्र रैकेट के खुलासे ने एक बार फिर डिजिटल धोखाधड़ी और साइबर फ्रॉड के बढ़ते खतरे को उजागर किया है, जिससे प्रशासन और आम लोगों दोनों के लिए सतर्क रहने की जरूरत और बढ़ गई है।





