
Jharkhand: जमशेदपुर। एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पहली बार घुटने की ऑर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी सफलतापूर्वक की गई है। इस उपलब्धि के साथ अस्पताल में न्यूनतम चीरा आधारित अस्थि रोग (ऑर्थोपेडिक) सेवाओं की शुरुआत हो गई है। इससे मरीजों को अब बड़े शहरों या निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
यह जटिल सर्जरी ऑर्थोपेडिक विभागाध्यक्ष डॉ. वाई. सांगा के नेतृत्व में की गई। मरीज 33 वर्षीय नीलम कुमारी लंबे समय से घुटने की समस्या से परेशान थीं और चलने-फिरने में काफी कठिनाई महसूस कर रही थीं। जांच में घुटने के लिगामेंट्स के बीच गैंग्लियन सिस्ट पाया गया, जो दर्द का मुख्य कारण था।
17 जून को एमजीएम अस्पताल की यूनिट-3 में डॉ. मृत्युंजय कुमार के नेतृत्व में सर्जरी की गई, जिसमें वरिष्ठ डॉक्टर शुभजीत हलदर और रत्नजीत चक्रवर्ती भी शामिल रहे। डॉक्टरों ने अत्याधुनिक ऑर्थ्रोस्कोपिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए छोटे-छोटे चीरे लगाकर सिस्ट को सफलतापूर्वक निकाल दिया। सर्जरी पूरी तरह सफल रही और किसी प्रकार की जटिलता नहीं हुई।
ऑपरेशन के बाद मरीज को दर्द से राहत मिली और घुटने की मूवमेंट भी सामान्य हो गई। डॉक्टरों के अनुसार यह तकनीक कम दर्द, कम रक्तस्राव और तेजी से रिकवरी के लिए जानी जाती है।
डॉक्टरों ने कहा कि इस सुविधा से कोल्हान क्षेत्र के मरीजों को बड़ा लाभ मिलेगा और कम खर्च में आधुनिक इलाज उपलब्ध हो सकेगा। अस्पताल में यह सर्जरी निशुल्क की गई, जबकि निजी अस्पतालों में इसके लिए भारी खर्च आता है।





