
Jharkhand झारखण्ड : धनबाद जिले में पैक्स (PACS) के माध्यम से धान अधिप्राप्ति के दौरान बड़े पैमाने पर गबन का मामला सामने आया है। जिला आपूर्ति कार्यालय और राज्यस्तरीय जांच टीम की संयुक्त जांच में अब तक 530.10 क्विंटल धान के गबन की पुष्टि हुई है। यह मामला तोपचांची प्रखंड के मदैयडीह पैक्स से जुड़ा हुआ है, जहां धान खरीद प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं।
मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। पैक्स प्रबंधक और अध्यक्ष के खिलाफ तोपचांची थाना में विभाग की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। इसके साथ ही प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) तोपचांची को पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार के निर्देश पर किसानों से धान की खरीद प्रक्रिया नियमित रूप से की जा रही थी। इसी क्रम में तोपचांची के मदैयडीह पैक्स ने कुल 3018.04 क्विंटल धान की खरीद की थी। सरकारी नियमों के अनुसार, पैक्स द्वारा किसानों से खरीदा गया धान निर्धारित राइस मिल को भेजा जाता है, जहां से उतनी ही मात्रा में प्रोसेस्ड धान वापस प्राप्त होता है।
लेकिन जांच के दौरान इस प्रक्रिया में बड़ा अंतर सामने आया। रिकॉर्ड के अनुसार, राइस मिल को 2507.82 क्विंटल धान उपलब्ध कराया गया, और यही मात्रा राइस मिल के दस्तावेजों में भी दर्ज पाई गई। जबकि पैक्स के रिकॉर्ड और भंडारण स्थिति में भारी अंतर पाया गया, जिससे गबन की पुष्टि हुई।
जांच टीम ने पाया कि कुल खरीद और मिल को भेजे गए धान के बीच 530.10 क्विंटल का अंतर है, जिसे अब तक अनियमित रूप से गबन माना जा रहा है। इस खुलासे के बाद विभागीय स्तर पर हड़कंप मच गया है और पूरे धान अधिप्राप्ति सिस्टम की जांच तेज कर दी गई है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह मामला केवल रिकॉर्ड की गड़बड़ी नहीं बल्कि वित्तीय अनियमितता और सरकारी अनाज के दुरुपयोग से जुड़ा हो सकता है। इसी वजह से मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं।
पैक्स स्तर पर हुई इस अनियमितता ने धान खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण स्तर पर किसानों से खरीदे जाने वाले अनाज की निगरानी और भंडारण व्यवस्था को लेकर अब प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।
प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि धान की मात्रा के रिकॉर्ड और वास्तविक भंडारण में असमानता लंबे समय से बनी हुई थी, लेकिन उचित समय पर इसकी जांच नहीं हो पाई। अब राज्यस्तरीय टीम द्वारा सभी संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।
स्थानीय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही अन्य पैक्स केंद्रों की भी जांच की जा रही है ताकि इस तरह की अनियमितताओं को रोका जा सके।
इस पूरे मामले ने सरकारी धान अधिप्राप्ति व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों और स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है, क्योंकि यह सीधे तौर पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली और सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा है।
फिलहाल प्रशासन जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि विस्तृत जांच के बाद पूरे घोटाले की परतें सामने आएंगी।





