झारखंड

झारखंड में 1.15 लाख घरों का निर्माण रुका

Saba Naaz
24 Jun 2026 9:40 PM IST
झारखंड में 1.15 लाख घरों का निर्माण रुका
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Jharkhand News: झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी अबुआ आवास योजना इस समय गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रही है। फंड की कमी के कारण राज्यभर में 1,15,063 आवासों का निर्माण कार्य पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। योजना के तहत हजारों लाभुकों ने अपने घरों का निर्माण प्लिंथ लेवल और सेकेंड लेवल तक पूरा कर लिया था, लेकिन समय पर दूसरी और तीसरी किस्त की राशि नहीं मिलने के कारण अब ये मकान अधूरे पड़े हुए हैं।

राज्य के 24 जिलों में इस योजना के तहत चल रहे आवास निर्माण कार्य अब ठप स्थिति में पहुंच चुके हैं। लाभुकों को लगातार आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि कई परिवारों ने निर्माण कार्य आगे बढ़ाने के लिए कर्ज भी लिया था, लेकिन सरकारी राशि नहीं मिलने से काम रुक गया है।

अबुआ आवास योजना के आधिकारिक पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, पूरे राज्य में 1,15,063 आवासों को पूरा करने के लिए कुल 994 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। यह राशि सीधे लाभुकों के बैंक खातों में DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी जानी है, लेकिन पिछले कई महीनों से भुगतान अटका हुआ है।

वित्तीय वर्षवार स्थिति

योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 के 14,083 लाभुकों और 2024-25 के 1,00,980 लाभुकों के आवास निर्माण कार्य प्रभावित हैं। दोनों वर्षों के लाभुकों को मिलाकर बड़ी संख्या में लोग इस योजना की देरी से परेशान हैं।

जिलावार स्थिति में पलामू सबसे आगे

जिलावार आंकड़ों में पलामू जिला सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां 86.57 करोड़ रुपये की राशि लंबित है। इसके बाद जामताड़ा में 79.18 करोड़ रुपये, पूर्वी सिंहभूम में 67.97 करोड़ रुपये, गिरिडीह में 66.62 करोड़ रुपये और चतरा में 63.61 करोड़ रुपये की राशि बकाया है।

इसके अलावा रांची, देवघर, गोड्डा, दुमका, बोकारो, हजारीबाग, धनबाद और अन्य जिलों में भी बड़ी मात्रा में भुगतान लंबित है। कई जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों ने राज्य सरकार को इस संबंध में पत्र भेजकर शीघ्र राशि जारी करने की मांग की है।

अन्य जिलों की स्थिति

बोकारो में 49.08 करोड़ रुपये, सरायकेला-खरसावां में 49.40 करोड़ रुपये, पश्चिमी सिंहभूम में 47.32 करोड़ रुपये, रांची में 58.58 करोड़ रुपये, देवघर में 57.04 करोड़ रुपये और दुमका में 52.35 करोड़ रुपये की राशि लंबित बताई जा रही है।

इसी तरह गोड्डा, गढ़वा, साहेबगंज, लातेहार, रामगढ़, लोहरदगा, सिमडेगा और खूंटी जैसे जिलों में भी करोड़ों रुपये की राशि अटकी हुई है।

लाभुकों की बढ़ती परेशानी

लाभुकों का कहना है कि उन्होंने सरकारी योजना पर भरोसा कर अपने घरों का निर्माण शुरू किया था। कई लोगों ने निर्माण सामग्री खरीदने के लिए स्थानीय स्तर पर उधारी भी ली है। लेकिन किस्त नहीं मिलने के कारण काम बीच में रुक गया है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

योजना पर असर

अबुआ आवास योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना है। लेकिन फंड की कमी के कारण इस महत्वाकांक्षी योजना की रफ्तार धीमी पड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही बजट जारी नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में अधूरे मकान और बढ़ सकते हैं।

सरकार पर बढ़ता दबाव

विभिन्न जिलों से लगातार मांग की जा रही है कि 994 करोड़ रुपये की आवश्यक राशि जल्द जारी की जाए, ताकि रुके हुए निर्माण कार्य दोबारा शुरू हो सकें। प्रशासनिक स्तर पर भी राज्य सरकार को इस समस्या से अवगत कराया गया है।

फिलहाल, पूरे राज्य में अबुआ आवास योजना को लेकर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है और लाभुकों की नजर अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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