
Jharkhand: Hemant Soren: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 3 जुलाई को झारखंड की बिजली व्यवस्था को मजबूत करने वाली कई बड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे. इनमें सबसे अहम 220 केवी दुमका-गोविंदपुर संचरण लाइन शामिल है, जो राज्य के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है. इसके साथ ही तीन नए ग्रिड सबस्टेशनों का भी उद्घाटन किया जाएगा, जिससे संताल परगना और कोयलांचल क्षेत्र की बिजली आपूर्ति व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है.
मुख्यमंत्री रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन से ऑनलाइन माध्यम के जरिए इन सभी परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे. झारखंड ऊर्जा संचरण निगम लिमिटेड (JUSNL) द्वारा तैयार की गई यह परियोजनाएं राज्य की बढ़ती बिजली मांग को ध्यान में रखकर विकसित की गई हैं. अधिकारियों का कहना है कि इन परियोजनाओं के शुरू होने से झारखंड के कई जिलों में बिजली आपूर्ति पहले से अधिक स्थिर और मजबूत होगी.
220 केवी दुमका-गोविंदपुर संचरण लाइन को राज्य की सबसे महत्वपूर्ण बिजली परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है. इस लाइन के शुरू होने से दुमका, देवघर, गोड्डा, पाकुड़, धनबाद और आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रणाली को मजबूती मिलेगी. इस नई ट्रांसमिशन लाइन से ग्रिड की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा, जिससे बढ़ती मांग को आसानी से पूरा किया जा सकेगा.
अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के शुरू होने से उपभोक्ताओं को लंबे समय से चली आ रही बिजली समस्याओं से राहत मिलेगी. इनमें ट्रिपिंग, लो-वोल्टेज और लोड शेडिंग जैसी दिक्कतें प्रमुख हैं. अब इन समस्याओं में काफी कमी आने की संभावना है. इससे घरेलू उपभोक्ताओं को जहां निर्बाध बिजली मिलेगी, वहीं औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों को भी स्थिर बिजली आपूर्ति का लाभ मिलेगा.
सरकार का मानना है कि इस परियोजना के लागू होने से संताल परगना और कोयलांचल क्षेत्र में विकास की गति तेज होगी. बिजली की बेहतर उपलब्धता से छोटे उद्योगों से लेकर बड़े औद्योगिक इकाइयों तक को लाभ मिलेगा, जिससे रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है.
इसके अलावा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तीन नए ग्रिड सबस्टेशनों का भी उद्घाटन करेंगे. इनमें पाकुड़ जिले के जियापानी स्थित 132/33 केवी ग्रिड सबस्टेशन अमड़ापाड़ा, पूर्वी सिंहभूम के सुरदा में 132/33 केवी ग्रिड सबस्टेशन और जामताड़ा के नारायणपुर में 132/33 केवी ग्रिड सबस्टेशन शामिल हैं.
इन सबस्टेशनों के शुरू होने से संबंधित जिलों में बिजली वितरण व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता और गुणवत्ता में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा. इन ग्रिडों की मदद से दूरदराज के गांवों तक 24 घंटे बिजली पहुंचाने की योजना को भी मजबूती मिलेगी.
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह सभी परियोजनाएं झारखंड की पावर डिस्ट्रीब्यूशन और ट्रांसमिशन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं. आने वाले समय में राज्य में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए इस तरह के और भी प्रोजेक्ट्स पर काम किया जाएगा.
सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से न सिर्फ शहरी क्षेत्रों को फायदा होगा, बल्कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों का जीवन स्तर भी सुधरेगा. कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग जैसे क्षेत्रों में बिजली की बेहतर उपलब्धता से व्यापक सुधार देखने को मिलेगा.
इस तरह 3 जुलाई का दिन झारखंड के लिए बिजली क्षेत्र में एक ऐतिहासिक दिन माना जा रहा है, जहां कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन कर राज्य को पावर रिवॉल्यूशन की दिशा में आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।





