झारखंड

झारखंड में मतदाता प्रक्रिया में बदलाव

Ashish verma
27 Jun 2026 9:25 PM IST
झारखंड में मतदाता प्रक्रिया में बदलाव
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झारखंड: मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के. रवि कुमार ने राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर नए और सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया केवल पात्र भारतीय नागरिकों के लिए ही है और इसमें किसी भी तरह की गलत जानकारी देना गंभीर अपराध माना जाएगा।

CEO ने शनिवार को निर्वाचन सदन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी प्रमंडलीय आयुक्तों को निर्देश दिया कि वे इस पूरी प्रक्रिया की कड़ी निगरानी करें। उन्होंने कहा कि गैर-भारतीय नागरिक या जिन्होंने भारत की नागरिकता छोड़ दी है, वे बिना फॉर्म भरे उसे तुरंत बीएलओ को लौटा दें। उन्होंने चेतावनी दी कि गलत जानकारी देकर वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम-1950 की धारा 31 के तहत दंडनीय अपराध है।

इस अभियान के तहत 30 जून 2026 से 29 जुलाई 2026 तक बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। इस दौरान मतदाताओं को आंशिक रूप से भरा हुआ इन्यूमरेशन फॉर्म दिया जाएगा और उनका रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो तथा हस्ताक्षर लेकर फॉर्म वापस जमा किया जाएगा।

निर्वाचन आयोग ने नागरिकता निर्धारण के लिए जन्म तिथि के आधार पर तीन नियम स्पष्ट किए हैं। 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे व्यक्ति के माता या पिता में से किसी एक का भारतीय नागरिक होना जरूरी है। वहीं 2 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे बच्चों के लिए दोनों माता-पिता का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है। यदि एक अभिभावक विदेशी है तो उसके पास वैध पासपोर्ट और वीजा होना चाहिए तथा वह अवैध प्रवासी नहीं होना चाहिए।

इसके अलावा, निर्वाचन सूची में नाम जोड़ने के लिए मतदाताओं को 11 निर्धारित दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज देना अनिवार्य होगा। चाहें तो पुरानी SIR सूची से भी मिलान कराया जा सकता है। पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रमंडलीय आयुक्तों को अपने क्षेत्रों में कम से कम तीन बार औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस बैठक में अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार और राज्य ट्रेनिंग नोडल पदाधिकारी देवदास दत्ता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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