
रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में अवैध मदिरा (शराब) निर्माण, परिवहन, बिक्री और तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को अधिकारियों के साथ समीक्षा के दौरान स्पष्ट कहा कि अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ तुरंत और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के सभी जिलों में अवैध शराब के निर्माण और बिक्री के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन और पुलिस विभाग को आपसी समन्वय के साथ काम करते हुए अवैध शराब के नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
हेमंत सोरेन ने कहा कि अवैध मदिरा का कारोबार एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक समस्या है। ऐसे कारोबार से जुड़े लोग कानून व्यवस्था को भी प्रभावित करते हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि केवल छोटे स्तर पर कार्रवाई करने के बजाय अवैध शराब के पूरे नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी है, ताकि इसके पीछे काम करने वाले लोगों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध शराब के सेवन से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। कई बार जहरीली शराब के सेवन से लोगों की जान तक चली जाती है। ऐसे मामलों को रोकने के लिए प्रशासन को पहले से सतर्क रहना होगा और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखनी होगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अवैध शराब के निर्माण वाले संभावित क्षेत्रों की पहचान कर नियमित छापेमारी की जाए। इसके अलावा शराब तस्करी के रास्तों पर भी नजर रखी जाए, ताकि दूसरे राज्यों से आने वाली अवैध शराब की आपूर्ति को रोका जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शराब के अवैध कारोबार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस मामले में किसी भी प्रकार के दबाव में आए बिना कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाकर यह संदेश दिया जाना चाहिए कि अवैध गतिविधियों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
बैठक में अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि अवैध शराब के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों की नियमित समीक्षा की जाए। जिलों में की गई कार्रवाई, जब्ती और गिरफ्तारियों की जानकारी उच्च स्तर पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि अभियान की प्रभावशीलता का आकलन किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल अवैध शराब को रोकना ही नहीं, बल्कि इससे जुड़े सामाजिक नुकसान को भी कम करना है। उन्होंने अधिकारियों को जागरूकता अभियान चलाने का सुझाव दिया, जिससे लोगों को अवैध शराब के खतरों के बारे में जानकारी दी जा सके।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस, उत्पाद विभाग और जिला प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। संयुक्त अभियान चलाकर अवैध शराब बनाने वालों, सप्लायरों और बिक्री करने वालों पर शिकंजा कसा जाएगा।
राज्य में शराब की अवैध बिक्री और तस्करी को लेकर सरकार पहले भी कई बार सख्त रुख अपना चुकी है। अधिकारियों का मानना है कि केवल कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, बल्कि अवैध कारोबार की जड़ों तक पहुंचना और उससे जुड़े आर्थिक नेटवर्क को तोड़ना जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अवैध शराब का कारोबार अक्सर ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों में अधिक सक्रिय रहता है। ऐसे क्षेत्रों में प्रशासन को स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र मजबूत करने और लोगों की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता होती है। आम लोगों से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर भी अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद राज्य के सभी जिलों में अधिकारियों को सतर्क कर दिया गया है। संबंधित विभागों को अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई तेज करने और नियमित निगरानी रखने को कहा गया है।
सरकार का कहना है कि अवैध शराब का कारोबार करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि आम लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता न हो।
फिलहाल मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। आने वाले दिनों में राज्यभर में अवैध शराब के खिलाफ विशेष अभियान चलाए जाने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य है कि अवैध मदिरा के निर्माण, परिवहन और बिक्री पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित किया जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।





