झारखंड

JPSC गड़बड़ी में CID का बड़ा दावा

Kavita2
9 Sept 2026 9:33 AM IST
JPSC गड़बड़ी में CID का बड़ा दावा
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रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में कथित गड़बड़ी मामले की जांच कर रही सीआईडी ने बड़ा दावा किया है। सीआईडी ने जेपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन एल ख्यांग्ते की जमानत याचिका का विरोध करते हुए अदालत में दिए हलफनामे में कहा है कि छापेमारी के बाद उन्होंने अपने आधिकारिक लैपटॉप और पेन ड्राइव से कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिटा दिए थे।

सीआईडी के इस दावे के बाद जेपीएससी मामले में जांच और तेज हो गई है। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गई और उन्हें नष्ट करने का प्रयास किया गया। हालांकि, इस मामले में आरोपी पक्ष की ओर से अभी कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

जमानत याचिका के विरोध में दिया हलफनामा

जानकारी के अनुसार, एल ख्यांग्ते की ओर से अदालत में जमानत याचिका दाखिल की गई थी। इसके विरोध में सीआईडी ने अपना पक्ष रखते हुए हलफनामा दाखिल किया।

हलफनामे में सीआईडी ने आरोप लगाया कि जेपीएससी कार्यालय में हुई छापेमारी के बाद तत्कालीन चेयरमैन ने अपने आधिकारिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से कई अहम जानकारियां हटाईं। जांच एजेंसी ने इसे साक्ष्यों को प्रभावित करने की कोशिश बताया है।

लैपटॉप और पेन ड्राइव की जांच में सामने आई बात

सीआईडी के अनुसार, जांच के दौरान जेपीएससी चेयरमैन के आधिकारिक लैपटॉप और पेन ड्राइव की जांच की गई। इसमें कई ऐसी गतिविधियों के संकेत मिले, जिनसे साक्ष्य हटाए जाने की आशंका जताई गई।

जांच एजेंसी का कहना है कि डिजिटल उपकरणों से डाटा डिलीट किया गया था। अब सीआईडी तकनीकी माध्यमों से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कौन-कौन से दस्तावेज या फाइलें हटाई गईं और उन्हें किस समय डिलीट किया गया।

जेपीएससी में कथित अनियमितताओं का मामला

जेपीएससी में कथित गड़बड़ी को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। आरोप है कि आयोग की कार्यप्रणाली में अनियमितताएं हुईं और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियां कई स्तरों पर जांच कर रही हैं। सीआईडी दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयान के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

डिजिटल साक्ष्य अहम भूमिका में

इस मामले में डिजिटल साक्ष्यों को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि लैपटॉप, पेन ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मौजूद जानकारी से पूरी प्रक्रिया और कथित गड़बड़ी से जुड़े कई तथ्य सामने आ सकते हैं।

इसी वजह से सीआईडी डिजिटल फॉरेंसिक जांच पर भी जोर दे रही है। डिलीट किए गए डाटा को रिकवर करने की कोशिश की जा रही है ताकि जांच को आगे बढ़ाया जा सके।

सीआईडी ने लगाए गंभीर आरोप

सीआईडी ने अदालत में कहा कि मामले की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। एजेंसी का दावा है कि आरोपी पद पर रहते हुए प्रभाव का इस्तेमाल कर सकते थे और जांच को प्रभावित करने की कोशिश भी की गई।

इसी आधार पर सीआईडी ने अदालत से जमानत नहीं देने का आग्रह किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और आगे कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।

आगे की जांच जारी

फिलहाल सीआईडी मामले की जांच में जुटी हुई है। जांच एजेंसी जेपीएससी से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संदिग्ध लोगों से पूछताछ कर सकती है।

इसके अलावा आयोग के कामकाज, चयन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित गड़बड़ी में किन लोगों की भूमिका रही।

मामले पर टिकी सभी की नजर

जेपीएससी जैसे महत्वपूर्ण संस्थान से जुड़े मामले में सीआईडी के दावों के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। युवाओं और अभ्यर्थियों की नजर अब जांच की आगे की कार्रवाई पर है।

यदि जांच में डिजिटल साक्ष्यों से जुड़े आरोप साबित होते हैं तो मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल अदालत में सीआईडी के हलफनामे के बाद मामला और गंभीर हो गया है और जांच एजेंसी अपनी कार्रवाई आगे बढ़ा रही है।

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