झारखंड

छऊ Artist Ranjit को मिला राष्ट्रीय सम्मान

Saba Naaz
16 Jun 2026 2:45 PM IST
छऊ Artist Ranjit को मिला राष्ट्रीय सम्मान
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Jharkhand:सरायकेला। सरायकेला छऊ के अंतरराष्ट्रीय कलाकार और छऊ नृत्य विचित्रा संस्था के सह निदेशक रंजीत कुमार आचार्य का चयन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की सीनियर फेलोशिप 2025-26 के लिए हुआ है। इस चयन के तहत उन्हें दो वर्षों तक शोध कार्य के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इस उपलब्धि से छऊ कला जगत में खुशी का माहौल है।

सीनियर फेलोशिप के तहत मिलेगा आर्थिक सहयोग

संस्कृति मंत्रालय की इस प्रतिष्ठित फेलोशिप के अंतर्गत रंजीत कुमार आचार्य को दो वर्षों तक हर महीने 20 हजार रुपये की सहायता मिलेगी। कुल मिलाकर यह राशि लगभग पांच लाख रुपये तक होगी। यह सहायता उनके शोध कार्य को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।

छऊ नृत्य पर करेंगे विस्तृत शोध कार्य

रंजीत आचार्य का शोध विषय “सरायकेला छऊ की वर्तमान वास्तविक स्थिति का आकलन, शास्त्रीय तत्व और संवर्धन के लिए भविष्य की कार्यपथ का निरूपण” रखा गया है। इस शोध के माध्यम से वे सरायकेला छऊ की वर्तमान स्थिति, इसके शास्त्रीय पक्ष और भविष्य में इसके संरक्षण व संवर्धन के उपायों पर विस्तृत अध्ययन करेंगे।

पहले भी मिल चुकी है राष्ट्रीय जूनियर फेलोशिप

रंजीत कुमार आचार्य को वर्ष 2008 में संस्कृति मंत्रालय की राष्ट्रीय जूनियर फेलोशिप भी मिल चुकी है। वे छऊ नृत्य के एक प्रख्यात कलाकार, वाद्यकार, मुखौटा निर्माता और विशेषज्ञ के रूप में देश-विदेश में अपनी पहचान बना चुके हैं।

गुरु और परंपरा को किया समर्पित

इस उपलब्धि को उन्होंने अपने पिता स्वर्गीय गुरु लिंगराज आचार्य को समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि वे अपने शोध कार्य को पद्मश्री गुरु शशधर आचार्य सहित छऊ के वरिष्ठ कलाकारों और विद्वानों के मार्गदर्शन में आगे बढ़ाएंगे।

वर्तमान में निभा रहे हैं महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

रंजीत कुमार आचार्य वर्तमान में झारखंड सरकार के पंचायती राज विभाग में राष्ट्रीय प्रशिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। इसके अलावा वे छऊ नृत्य विचित्रा संस्था में सह निदेशक और सह कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। वे समय-समय पर छऊ नृत्य की परंपरा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत करते रहे हैं।

छऊ जगत में खुशी की लहर

उनके चयन की खबर से सरायकेला छऊ जगत में उत्साह का माहौल है। कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों ने इसे छऊ परंपरा के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है।

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