
Jharkhand:रांची के दात्मा गांव से जुड़े लंबे समय से चल रहे जमीन विवाद मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राम किशन महतो और पंचमी देवी की दूसरी अपील को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने कहा कि निचली अदालतों और प्रथम अपीलीय अदालत के फैसलों में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं पाई गई है, इसलिए हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
यह मामला रांची जिले के सिकिदिरी थाना क्षेत्र स्थित जमीन विवाद से जुड़ा है। अपीलकर्ताओं ने रांची के एडिशनल ज्यूडिशियल कमिश्नर-XVII के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में दूसरी अपील दायर की थी। इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने वादी मो. सलीम खान के पक्ष में एकतरफा डिक्री पारित की थी, जिसे बाद में प्रथम अपीलीय अदालत ने भी बरकरार रखा। वादी पक्ष ने 14 नवंबर 1945 के बिक्री विलेख के आधार पर जमीन पर स्वामित्व और कब्जे की मांग की थी। अदालत ने पाया कि दस्तावेजों और गवाहों के बयान वादी के दावे का समर्थन करते हैं। वहीं अपीलकर्ताओं का दावा अलग प्लॉट से संबंधित था, लेकिन वे इसे साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि अपीलकर्ताओं ने सुनवाई के दौरान अतिरिक्त साक्ष्य पेश करने का अवसर मिलने के बावजूद कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया। अदालत ने कहा कि दोनों निचली अदालतों के निष्कर्ष तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों पर आधारित हैं। अंत में अदालत ने कहा कि इस मामले में कोई महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न नहीं बनता, इसलिए दूसरी अपील स्वीकार नहीं की जा सकती। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने अपील खारिज करते हुए मो. सलीम खान के पक्ष में निचली अदालतों के आदेश को अंतिम रूप से बरकरार रखा।
इस फैसले के साथ दात्मा गांव की जमीन से जुड़ा पुराना विवाद एक अहम कानूनी मोड़ पर समाप्त हो गया है।





