झारखंड
8.86 एकड़ जमीन मामले में CM हेमंत सोरेन पर आरोप तय PMLA कोर्ट का फैसला
Ratna Netam
30 Sept 2026 8:23 PM IST

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रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कानूनी मुश्किलें बुधवार को बढ़ गईं, जब रांची की विशेष प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) अदालत ने बरगाई सर्कल की कथित 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनके खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए। मुख्यमंत्री सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के सामने पेश हुए। आरोप पढ़कर सुनाए जाने के बाद सोरेन ने उन्हें स्वीकार करने से इनकार करते हुए खुद को निर्दोष बताया।
आरोप तय होने के साथ ही इस मामले में अब नियमित ट्रायल शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। अदालत ने अभियोजन पक्ष को अपने गवाह पेश करने का निर्देश दिया है और अगली सुनवाई 30 नवंबर के लिए निर्धारित की गई है। इस मामले में कुल 17 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है। अन्य आरोपियों के खिलाफ पहले ही आरोप तय किए जा चुके थे, जबकि हेमंत सोरेन के मामले में प्रक्रिया बुधवार को पूरी हुई।
मामला रांची के बरगाई सर्कल क्षेत्र में स्थित 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि जमीन को कथित रूप से अवैध तरीके से हासिल करने और उससे जुड़े रिकॉर्ड में हेरफेर करने की कोशिश की गई। एजेंसी ने जांच में जमीन के स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड में कथित बदलाव का मामला उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शुरू से इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं।
बुधवार की सुनवाई के दौरान अदालत ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को पढ़कर सुनाया। मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वह निर्दोष हैं। आरोप तय होना किसी आरोपी को दोषी ठहराए जाने के बराबर नहीं होता। अब अभियोजन पक्ष को अदालत में अपने सबूत और गवाह पेश करने होंगे तथा बचाव पक्ष को उनसे जिरह और अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
इससे पहले हेमंत सोरेन ने विशेष PMLA अदालत में आरोप तय करने की प्रक्रिया रोकने के लिए राहत मांगी थी। उनकी ओर से तर्क दिया गया था कि मामले में एजेंसी की आगे की जांच जारी रहने के दौरान आरोप तय नहीं किए जाने चाहिए। विशेष अदालत ने यह मांग स्वीकार नहीं की और कहा कि पूरक जांच जारी रहने मात्र से मूल शिकायत के आधार पर ट्रायल प्रक्रिया रोकना जरूरी नहीं है।
हेमंत सोरेन ने इस आदेश को झारखंड हाई कोर्ट में भी चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने 18 सितंबर को निचली अदालत की कार्यवाही और आरोप तय करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद विशेष PMLA कोर्ट में कार्यवाही जारी रही।
मामले में इससे पहले सोरेन की डिस्चार्ज याचिका भी खारिज हो चुकी है। विशेष अदालत ने 8 जून को उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर प्रथम दृष्टया मामले को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। अदालत ने उस समय यह भी स्पष्ट किया था कि इस चरण पर दोष या निर्दोषता का अंतिम निर्णय नहीं किया जा रहा है। बाद में हाई कोर्ट ने भी इस मामले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
सितंबर में आरोप तय करने की प्रक्रिया कई बार तारीखों और तकनीकी कारणों के चलते आगे बढ़ी। 19 सितंबर को मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे और उनके वकील ने संवैधानिक जिम्मेदारियों का हवाला दिया था। अदालत ने उन्हें अगली तारीख पर व्यक्तिगत या वर्चुअल माध्यम से उपस्थित होने का निर्देश दिया। 21 सितंबर को तकनीकी समस्या के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नहीं हो सकी और सुनवाई आगे बढ़ानी पड़ी।
इसके बाद 25 सितंबर को आरोप तय करने की कार्यवाही फिर स्थगित की गई। उस समय मुख्यमंत्री की ओर से प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उपलब्ध कराए गए कुछ दस्तावेजों का अध्ययन करने के लिए समय मांगा गया था। अदालत ने 30 सितंबर की तारीख तय की थी और बुधवार को इसी प्रक्रिया के तहत आरोप तय कर दिए गए।
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में आरोप लगाया है कि बरगाई सर्कल की जमीन के रिकॉर्ड और दस्तावेजों में कथित हेरफेर कर संपत्ति पर अवैध कब्जे की कोशिश की गई। एजेंसी का दावा है कि जांच में बरामद दस्तावेजों, गवाहों के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से मनी लॉन्ड्रिंग का प्रथम दृष्टया मामला बनता है। सोरेन और उनके वकील इन आरोपों का लगातार विरोध करते रहे हैं और उनका कहना है कि उन्हें मामले से जोड़ने वाला पर्याप्त प्रत्यक्ष सबूत मौजूद नहीं है।
हेमंत सोरेन को इसी मामले की जांच के दौरान 31 जनवरी 2024 को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। बाद में 28 जून 2024 को झारखंड हाई कोर्ट से उन्हें जमानत मिली थी। जमानत मिलने के बाद वह दोबारा मुख्यमंत्री बने।
बुधवार को हाई कोर्ट में भी मामले से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय से पूरक हलफनामा मांगा और याचिका की स्वीकार्यता से जुड़े मुद्दे पर आगे की सुनवाई के लिए 28 अक्टूबर की तारीख तय की। इसके बावजूद विशेष PMLA कोर्ट की आरोप तय करने की प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगी और निचली अदालत ने बुधवार को औपचारिक आरोप तय कर दिए।
अब इस मामले का अगला चरण गवाहों और सबूतों की जांच का होगा। अभियोजन पक्ष अदालत में अपना पक्ष रखेगा, जबकि बचाव पक्ष आरोपों को चुनौती देगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। ऐसे में उनके खिलाफ आरोप तय होना केवल ट्रायल प्रक्रिया की शुरुआत है और मामले में दोष या निर्दोषता का अंतिम फैसला सबूतों और पूरी सुनवाई के बाद ही अदालत करेगी।
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