झारखंड

मनी लॉन्ड्रिंग केस में हेमंत सोरेन की याचिका पर हाई कोर्ट ने ED से मांगा जवाब

Kavita2
30 Sept 2026 4:03 PM IST
मनी लॉन्ड्रिंग केस में हेमंत सोरेन की याचिका पर हाई कोर्ट ने ED से मांगा जवाब
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रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बुधवार को झारखंड हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय यानी ED से जवाब मांगा है और केंद्र सरकार को भी मामले में प्रतिवादी बनाया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने निचली अदालत में चल रही आरोप गठन की प्रक्रिया पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई। अदालत ने स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट में याचिका लंबित होने का आधार बनाकर विशेष PMLA अदालत से समय नहीं मांगा जाए। ऐसे में निचली अदालत में हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

मामला बड़गाईं क्षेत्र की जमीन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण से संबंधित है। ED ने इस मामले में जांच के बाद विशेष अदालत में कार्रवाई शुरू की है। हेमंत सोरेन ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का रुख किया है। इससे पहले विशेष PMLA अदालत ने उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी थी।

हाई कोर्ट में बुधवार की सुनवाई के दौरान ED की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू, वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने पक्ष रखा। अदालत ने उनकी दलीलों को सुनने के बाद ED से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा।

हेमंत सोरेन की ओर से यह मामला निचली अदालत की कार्यवाही और आरोप गठन से जुड़ा है। उनकी याचिका में विशेष अदालत के आदेश को चुनौती दी गई है और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल उठाए गए हैं।

इससे पहले इस मामले में आरोप गठन की तारीख कई बार आगे बढ़ चुकी है। 24 सितंबर को विशेष PMLA अदालत ने आरोप तय करने की प्रक्रिया को 30 सितंबर तक के लिए टाल दिया था। उस समय हेमंत सोरेन ने ED की ओर से उपलब्ध कराए गए कुछ दस्तावेजों का अध्ययन करने के लिए समय मांगा था। अदालत ने उन्हें दस्तावेज देखने का अवसर दिया था।

अब हाई कोर्ट की ओर से निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक नहीं लगाए जाने के बाद विशेष अदालत आरोप गठन पर आगे बढ़ सकती है। हालांकि आरोप वास्तव में कब तय होंगे, इसका निर्णय संबंधित अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल इस आधार पर कि मामला उच्च न्यायालय में लंबित है, निचली अदालत में कार्यवाही स्थगित करने का अनुरोध न किया जाए। इस निर्देश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे विशेष अदालत की कार्यवाही जारी रहने का रास्ता खुला है।

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हेमंत सोरेन पहले भी हाई कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल कर चुके हैं। 18 सितंबर के एक आदेश में हाई कोर्ट ने एक अलग पुनरीक्षण याचिका और अंतरिम आवेदन पर सुनवाई की थी, जिसमें निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की गई थी। अदालत ने उस समय भी ED से जवाब मांगा था।

इस पूरे मामले का संबंध उस जमीन प्रकरण से है, जिसमें ED ने कथित तौर पर 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े लेनदेन और दस्तावेजों की जांच की है। विशेष अदालत में इसी मामले को लेकर आपराधिक कार्यवाही चल रही है।

हेमंत सोरेन की ओर से इस मामले में कई कानूनी आधारों पर राहत मांगी गई है। दूसरी तरफ ED का कहना है कि उसके पास मामले में आगे की कार्रवाई के लिए पर्याप्त सामग्री है। इन दलीलों पर अंतिम फैसला अदालत को करना है।

राज्य के मुख्यमंत्री से जुड़ा मामला होने के कारण इस सुनवाई पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर नजर बनी हुई है। हालांकि हाई कोर्ट की मौजूदा कार्यवाही कानूनी सवालों तक सीमित है और अदालत ने अभी मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।

अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को तय की गई है। इससे पहले ED को अपना जवाब दाखिल करना होगा। केंद्र सरकार को प्रतिवादी बनाए जाने के बाद उसकी ओर से भी संबंधित कानूनी पक्ष रखा जा सकता है।

इस बीच विशेष PMLA अदालत में आरोप गठन की प्रक्रिया जारी रह सकती है। यदि अदालत उपलब्ध रिकॉर्ड और दलीलों के आधार पर आगे बढ़ती है तो हेमंत सोरेन और अन्य आरोपियों के खिलाफ औपचारिक आरोप तय किए जा सकते हैं।

आरोप तय होना किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करना नहीं होता। यह आपराधिक मुकदमे की वह प्रक्रिया है जिसमें अदालत यह तय करती है कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर किन आरोपों पर मुकदमा चलाया जाएगा।

इसके बाद अभियोजन पक्ष अपने साक्ष्य पेश करता है और बचाव पक्ष को उनका जवाब देने का अवसर मिलता है। अंत में अदालत सभी साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर फैसला देती है।

फिलहाल झारखंड हाई कोर्ट ने ED से जवाब मांगते हुए मामले को 28 अक्टूबर तक के लिए सूचीबद्ध किया है। साथ ही निचली अदालत की आरोप गठन प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई गई है।

ऐसे में हेमंत सोरेन से जुड़े इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अब दो समानांतर कानूनी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण हो गई हैं। एक तरफ हाई कोर्ट में उनकी याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी, वहीं दूसरी ओर विशेष PMLA अदालत में आरोप गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

आने वाले दिनों में ED के जवाब और निचली अदालत की अगली कार्यवाही से इस मामले की दिशा और स्पष्ट होगी।

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