
झारखण्ड: झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2019 के चर्चित चांडिल हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए फांसी की सजा पाए चुन्नू मांझी उर्फ पुटरू को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें उसे पांच लोगों की हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई गई थी।
निचली अदालत का फैसला रद्द
हाईकोर्ट ने 23 सितंबर 2025 को चांडिल के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा सुनाई गई सजा और 25 सितंबर 2025 को दी गई फांसी की सजा को खारिज कर दिया। अदालत ने आदेश दिया कि यदि आरोपी किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तुरंत रिहा किया जाए। राज्य सरकार द्वारा फांसी की सजा की पुष्टि के लिए दायर अपील भी खारिज कर दी गई।
अभियोजन पक्ष पर उठे सवाल
हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि दो संभावनाओं की स्थिति में आरोपी को लाभ मिलना चाहिए। इसी आधार पर चुन्नू मांझी को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया गया।
जांच में मिली गंभीर खामियां
अदालत ने जांच प्रक्रिया में कई विरोधाभासों की ओर इशारा किया। जांच अधिकारी के बयान और पंचनामा रिपोर्ट में घटनास्थल को लेकर अंतर पाया गया। कहीं शव आंगन से मिलने की बात कही गई तो कहीं कमरे से। इससे घटना स्थल पर संदेह पैदा हुआ।
जब्ती और साक्ष्य पर सवाल
कोर्ट ने यह भी पाया कि जब्त कुल्हाड़ियों में खून के धब्बों का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। वहीं फॉरेंसिक दस्तावेजों में कपड़ों के विवरण में भी अंतर मिला, जिससे साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए।
2019 में हुई थी पांच लोगों की हत्या
चुन्नू मांझी पर अपने रिश्तेदार रवि मांझी, उनकी पत्नी और तीन बच्चों की हत्या का आरोप था। निचली अदालत ने उसे दोषी मानते हुए फांसी, जुर्माना और अन्य सजा सुनाई थी। प्राथमिकी उसके भाई के बयान पर दर्ज की गई थी।
फैसला बना चर्चा का विषय
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद न्यायिक प्रक्रिया, साक्ष्यों की जांच और दोष सिद्ध करने के मानकों पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आरोप नहीं, बल्कि मजबूत और विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक हैं।





