
झारखंड: हाईकोर्ट ने जामताड़ा के दैनिक वेतनभोगी जीप चालक रोशन दास को बड़ी राहत दी है। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा उनके नियमितीकरण से इनकार करने के आदेश को रद्द करते हुए उनकी सेवा को नियमित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि केवल तकनीकी आधार पर लंबे समय से कार्यरत कर्मचारी को नियमितीकरण से वंचित नहीं किया जा सकता।
मामला जामताड़ा जिला कल्याण विभाग में वर्ष 2009 से कार्यरत रोशन दास से जुड़ा है। वे रिक्त स्वीकृत पद पर जीप चालक के रूप में लगातार सेवाएं दे रहे थे। विभाग ने समय-समय पर उनके अनुभव प्रमाण पत्र भी जारी किए और मानदेय का भुगतान किया। वर्ष 2019 में उन्होंने नियमितीकरण के लिए आवेदन दिया था, जिसके बाद कई स्तरों पर उनकी फाइल पर विचार हुआ, लेकिन राज्य स्तरीय समिति ने दिसंबर 2025 में उनका दावा खारिज कर दिया था।
सरकार ने उनके नियमितीकरण से इनकार करते हुए चार मुख्य आधार दिए थे—कथित अवैध नियुक्ति, कट-ऑफ तिथि तक सेवा पूरी न होना, शैक्षणिक योग्यता और जेएसएससी भर्ती प्रक्रिया का अभाव। हाईकोर्ट ने इन सभी तर्कों को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि रोशन दास लंबे समय से विभाग में कार्यरत हैं और उनकी नियुक्ति रिक्त पद पर विभागीय पत्र के आधार पर हुई थी।
कोर्ट ने यह भी माना कि उन्होंने एनआईओएस से मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है, इसलिए शैक्षणिक योग्यता का आधार भी मान्य नहीं है। वहीं जेएसएससी भर्ती का तर्क भी खारिज कर दिया गया क्योंकि इस पद के लिए कोई भर्ती प्रक्रिया ही नहीं हुई थी।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। अदालत ने कहा कि यह मामला पूरी तरह अवैध नियुक्ति का नहीं है, बल्कि प्रक्रियागत अनियमितता का है।
अंत में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के आदेश को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि आठ सप्ताह के भीतर रोशन दास की सेवा जीप चालक के पद पर नियमित की जाए। इस फैसले के बाद याचिका का निपटारा कर दिया गया।





