
झारखंड हाईकोर्ट: जामताड़ा के दैनिक वेतनभोगी जीप चालक रोशन दास के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा उनके नियमितीकरण से इनकार करने के आदेश को रद्द कर दिया है और उन्हें राहत देते हुए सेवा नियमित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रोशन दास की सेवा को केवल तकनीकी आधार पर नकारा नहीं जा सकता। अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि आठ सप्ताह के भीतर उनकी सेवा जीप चालक के पद पर नियमित की जाए।
मामला जामताड़ा जिला कल्याण विभाग में वर्ष 2009 से कार्यरत रोशन दास से जुड़ा है, जो रिक्त स्वीकृत पद पर जीप चालक के रूप में कार्य कर रहे थे। उन्होंने लंबे समय तक दैनिक वेतनभोगी के रूप में सेवाएं दीं और विभाग द्वारा समय-समय पर उनका अनुभव प्रमाणपत्र भी जारी किया गया। वर्ष 2019 में उन्होंने नियमितीकरण के लिए आवेदन दिया था, जिसके बाद कई स्तरों पर उनकी फाइल पर विचार हुआ, लेकिन राज्य स्तरीय समिति ने 2025 में उनका दावा खारिज कर दिया था।
राज्य सरकार ने नियमितीकरण से इनकार करते हुए चार मुख्य तर्क दिए थे। सरकार का कहना था कि उनकी नियुक्ति सक्षम प्राधिकारी द्वारा नहीं की गई थी, वे कट-ऑफ तिथि तक 10 वर्ष की सेवा पूरी नहीं कर पाए, उनकी शैक्षणिक योग्यता मैट्रिक नहीं थी और जीप चालक की नियुक्ति जेएसएससी के माध्यम से होनी चाहिए। इन सभी आधारों पर उन्हें नियमित नहीं किया गया था।
हाईकोर्ट ने सरकार के सभी तर्कों को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि रोशन दास की नियुक्ति रिक्त स्वीकृत पद पर हुई थी और विभाग ने वर्षों तक उनकी सेवाएं ली हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि वे लगातार 2009 से कार्यरत हैं और इस आधार पर उन्हें केवल तकनीकी कारणों से बाहर नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि सरकार स्वयं उनकी सेवाएं लेती रही, इसलिए अब नियमितीकरण से इनकार उचित नहीं है।
शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी सरकार का तर्क अस्वीकार कर दिया गया। अदालत ने पाया कि रोशन दास ने 2017 में एनआईओएस से मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी। वहीं जेएसएससी भर्ती प्रक्रिया का तर्क भी कोर्ट ने खारिज करते हुए कहा कि इस पद के लिए अब तक कोई भर्ती प्रक्रिया नहीं हुई है, इसलिए यह आधार भी लागू नहीं होता।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला दिया और कहा कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के मामलों में न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यह मामला अवैध नियुक्ति का नहीं बल्कि प्रक्रियागत अनियमितता का प्रतीत होता है, इसलिए नियमितीकरण पर सकारात्मक विचार जरूरी है।
अंत में अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह आठ सप्ताह के भीतर रोशन दास की सेवा को नियमित करे। इस फैसले के साथ ही याचिका का निपटारा कर दिया गया।





