
कोडरमा: झारखंड के कोडरमा जिले से ऑनर किलिंग (सम्मान के नाम पर हत्या) के एक सनसनीखेज मामले में अदालत का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (तृतीय) राकेश चंद्रा की अदालत ने एक नाबालिग लड़की की हत्या के मामले में उसके सगे भाई को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, अपराध को छुपाने और सबूत मिटाने में मदद करने के दोषी वृद्ध पिता को भी तीन साल के कारावास की सजा दी गई है। अदालत ने यह फैसला वैज्ञानिक साक्ष्यों, परिस्थितियों और गवाहों के बयानों के आधार पर सुनाया है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला फरवरी 2025 का है, जब मरकच्चो थाना क्षेत्र के भगवतीडीह गांव में इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया। घटना के बाद परिवार ने मामले को दबाने और पुलिस को गुमराह करने की पूरी साजिश रची थी। मृतका के एक भाई नीतीश पांडेय ने मरकच्चो थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी नाबालिग बहन निभा पांडेय को कोई अज्ञात युवक बहला-फुसलाकर अपने साथ भगा ले गया है। पुलिस ने शुरुआती दौर में इसे अपहरण का मामला मानकर जांच शुरू की थी।
पुलिस जांच में खुला ऑनर किलिंग का राज
मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी सौरभ शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने अनुसंधान तेज किया। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस के सामने चौंकाने वाले तथ्य आने लगे। वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों (Circumstantial Evidence) ने अपहरण की कहानी को पूरी तरह खारिज कर दिया। पुलिस को समझ आ गया कि मामला बाहर का नहीं, बल्कि घर के भीतर का ही है। गहन पूछताछ और कड़ाई से की गई तफ्तीश के बाद आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। यह साफ हो गया कि पारिवारिक प्रतिष्ठा और कथित सम्मान के नाम पर नाबालिग बहन निभा पांडेय की घर के भीतर ही गला घोंटकर या अन्य तरीके से बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद साक्ष्यों को पूरी तरह से मिटाने और शव को गुप्त तरीके से ठिकाने लगाने का प्रयास भी किया गया था। पुलिस ने पुख्ता सबूत जुटाकर अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की।
अदालत में दलीलें और सजा का ऐलान
मामले की नियमित सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष (Prosecution) की ओर से लोक अभियोजक प्रवीण कुमार सिंह ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अदालत के सामने पुलिस द्वारा जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्य और गवाहों के बयान पेश करते हुए दलील दी कि यह समाज को कलंकित करने वाला जघन्य अपराध है, इसलिए अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। दूसरी तरफ, बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनवर हुसैन ने अपने मुवक्किलों के पक्ष में दलीलें दीं। दोनों पक्षों की लंबी बहस और साक्ष्यों का बारिकी से मुआयना करने के बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष के दावों को सही पाया। न्यायालय ने मुख्य आरोपी भाई ज्योतिष पांडेय (20 वर्ष) को अपनी ही बहन की हत्या का मुख्य दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, जुर्म को छिपाने और पुलिस को गुमराह करने के दोषी 70 वर्षीय पिता मदन पांडेय को तीन साल की जेल और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी गई। इस फैसले के साथ ही कोडरमा के इस बहुचर्चित हत्याकांड के पीड़ितों को न्याय मिल गया है।





