झारखंड

युवाओं को बड़ा झटका, स्टेनोग्राफर परीक्षा हुई निरस्त

Saba Naaz
29 Jun 2026 8:40 PM IST
युवाओं को बड़ा झटका, स्टेनोग्राफर परीक्षा हुई निरस्त
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रांची : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की सचिवालय आशुलिपिक प्रतियोगिता परीक्षा-2024 को लेकर बड़ा निर्णय सामने आया है। आयोग ने विज्ञापन संख्या 24/2024 और 25/2024 के तहत आयोजित की जाने वाली झारखंड सचिवालय आशुलिपिक प्रतियोगिता परीक्षा (JSSCE-2024) को पूरी तरह रद्द कर दिया है। इस फैसले से राज्य भर के हजारों अभ्यर्थियों में निराशा और आक्रोश का माहौल देखा जा रहा है, जो लंबे समय से इस भर्ती प्रक्रिया का इंतजार कर रहे थे।

आयोग द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार यह निर्णय तकनीकी और प्रशासनिक कारणों के चलते लिया गया है। जेएसएससी ने बताया कि राज्य के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने अपने पत्र संख्या-4164 (दिनांक 23 जून 2026) के माध्यम से इस भर्ती के लिए भेजी गई अधियाचना (रिक्विजिशन) को वापस ले लिया है। विभाग द्वारा रिक्तियों की मांग वापस लेने के बाद आयोग के पास इस परीक्षा प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का कोई आधार नहीं बचा, जिसके कारण पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द करना पड़ा।

इस परीक्षा के माध्यम से झारखंड सचिवालय के विभिन्न विभागों में कुल 455 पदों पर नियुक्ति होनी थी। इनमें 454 पद नियमित श्रेणी के थे, जबकि 1 पद बैकलॉग श्रेणी का था। इसके लिए राज्यभर से बड़ी संख्या में युवाओं ने आवेदन किया था और लंबे समय से शॉर्टहैंड एवं टाइपिंग की तैयारी कर रहे थे। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा रद्द होने से उनकी मेहनत, समय और आर्थिक संसाधनों पर गंभीर असर पड़ा है। आधिकारिक आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि विज्ञापन जारी होने के बाद से ही चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही थी, लेकिन विभागीय स्तर पर अधियाचना वापस लेने के कारण यह प्रक्रिया कानूनी और प्रशासनिक रूप से आगे नहीं बढ़ सकती थी। इसी वजह से आयोग को मजबूरी में यह निर्णय लेना पड़ा।

इस फैसले के बाद छात्रों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं में निराशा फैल गई है। कई छात्र संगठनों ने भी इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा है कि बार-बार परीक्षा प्रक्रियाओं के रद्द होने से अभ्यर्थियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है। अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की है कि भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और स्थिर बनाया जाए ताकि इस तरह की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

दूसरी ओर प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह विभागीय स्तर पर रिक्तियों की पुनर्समीक्षा और नीति बदलाव से जुड़ा हुआ है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इन 455 पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया कब और किस रूप में शुरू की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की भर्ती प्रणाली और परीक्षा प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर एक बार फिर चर्चा छेड़ दी है। अभ्यर्थी अब आने वाले समय में सरकार और आयोग से नए दिशा-निर्देशों की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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