झारखंड

यूको बैंक में हथियारबंद बदमाशों का धावा, करोड़ों की लूट,अपराधी फरार

Rajeshwari Nishad
5 Nov 2026 4:04 PM IST
यूको बैंक में हथियारबंद बदमाशों का धावा, करोड़ों की लूट,अपराधी फरार
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गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले के धनवार बाजार में गुरुवार को दिनदहाड़े बैंक डकैती की बड़ी वारदात सामने आई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, धनवार बाजार के चमड़ा गोदाम इलाके में स्थित यूको बैंक की शाखा में पांच हथियारबंद अपराधियों ने धावा बोल दिया। बदमाशों पर बैंक से करीब तीन से चार करोड़ रुपये मूल्य के सोने के जेवरात और 10 से 12 लाख रुपये नकद लूटकर फरार होने का आरोप है। घटना के बाद बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, गुरुवार को बैंक में सामान्य कामकाज चल रहा था। इसी दौरान हथियारों से लैस पांच अपराधियों के बैंक में पहुंचने और लूट की वारदात को अंजाम देने की सूचना सामने आई। बताया जा रहा है कि अपराधियों ने बैंक में रखे सोने के जेवरात और नकदी को निशाना बनाया। लूटपाट के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए।
घटना में लूटी गई संपत्ति का मूल्य काफी अधिक होने की आशंका जताई जा रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, सोने के जेवरात की अनुमानित कीमत तीन से चार करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि नकदी की रकम 10 से 12 लाख रुपये के बीच बताई जा रही है। हालांकि, बैंक की ओर से विस्तृत मिलान और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही लूट की वास्तविक राशि स्पष्ट हो सकेगी।बैंक से इतनी बड़ी मात्रा में सोने के जेवरात लूटे जाने की सूचना ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अपराधियों ने इतनी बड़ी वारदात को किस तरह अंजाम दिया और उन्हें बैंक में रखे कीमती सामान की जानकारी पहले से थी या नहीं। हालांकि, इस संबंध में किसी अंदरूनी व्यक्ति की संलिप्तता का प्रमाण सामने नहीं आया है।
दिनदहाड़े हुई इस कथित डकैती के बाद बैंक की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। बैंकिंग संस्थानों में नकदी और कीमती सामान की सुरक्षा के लिए विभिन्न स्तरों पर व्यवस्थाएं की जाती हैं। इसके बावजूद यदि हथियारबंद अपराधी बैंक में प्रवेश कर बड़ी मात्रा में संपत्ति लेकर फरार हो जाते हैं, तो सुरक्षा संबंधी खामियों की जांच आवश्यक हो जाती है।इस मामले में यह जानकारी भी महत्वपूर्ण होगी कि घटना के समय बैंक में कितने कर्मचारी और ग्राहक मौजूद थे। अपराधियों ने किस रास्ते से बैंक में प्रवेश किया, कितनी देर तक भीतर रहे और किस दिशा में फरार हुए, इन सवालों के जवाब मिलने से वारदात का घटनाक्रम स्पष्ट हो सकेगा।
बैंक परिसर तथा आसपास के प्रतिष्ठानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि घटना के समय की फुटेज उपलब्ध होती है, तो उससे अपराधियों की पहचान, उनकी गतिविधियों और इस्तेमाल किए गए वाहनों के बारे में जानकारी मिल सकती है।इसी तरह बैंक में मौजूद कर्मचारियों और ग्राहकों के बयान भी घटना की परिस्थितियों को समझने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध प्रारंभिक विवरण में यह स्पष्ट नहीं है कि अपराधियों ने बैंक कर्मचारियों को बंधक बनाया था या किसी के साथ मारपीट की थी।
सोने के जेवरात के संबंध में भी कई जानकारियां सामने आनी बाकी हैं। यह पता लगाना आवश्यक होगा कि लूटा गया सोना किस श्रेणी में बैंक के पास रखा गया था। बैंक में गोल्ड लोन के बदले जमा कराए गए आभूषण और ग्राहकों के लॉकर में रखी संपत्ति अलग-अलग व्यवस्थाओं के अंतर्गत आते हैं। इसलिए वास्तविक स्थिति बैंक के आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी।यदि लूटे गए आभूषण ग्राहकों द्वारा ऋण के बदले गिरवी रखे गए थे, तो संबंधित ग्राहकों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे मामलों में बैंक को अपने दस्तावेजों और सुरक्षा प्रक्रियाओं के आधार पर नुकसान का आकलन करना होता है।
धनवार बाजार एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक क्षेत्र है। यहां बैंकिंग गतिविधियों के साथ स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों के वित्तीय लेन-देन भी जुड़े रहते हैं। ऐसे इलाके में दिन के समय हथियारबंद लूट की घटना सामने आने से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ सकती है।गिरिडीह जिले में इससे पहले भी चोरी और लूट की घटनाएं सामने आती रही हैं। अक्टूबर 2026 में पुलिस ने जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से जुड़े 13 चोरी के मामलों का खुलासा करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार करने की जानकारी दी थी। हालांकि, उन मामलों और धनवार की इस बैंक डकैती के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं है।
झारखंड में बैंक सुरक्षा का मुद्दा पिछले कुछ समय से चर्चा में रहा है। सितंबर 2026 में जमशेदपुर के गोलमुरी स्थित केनरा बैंक में भी बड़ी डकैती की घटना सामने आई थी। उस मामले में हथियारबंद अपराधियों पर करोड़ों रुपये के सोने और नकदी की लूट का आरोप लगा था। धनवार की ताजा घटना ने बैंक सुरक्षा संबंधी चिंताओं को फिर सामने ला दिया है।बड़ी बैंक डकैती की जांच में अपराधियों की पहचान के साथ लूट की संपत्ति की बरामदगी भी महत्वपूर्ण होती है। इसके लिए घटना से जुड़े तकनीकी साक्ष्य, आसपास की गतिविधियां और संभावित भागने के रास्तों की जानकारी उपयोगी हो सकती है।
इस वारदात में शामिल पांचों आरोपियों की गिरफ्तारी, इस्तेमाल किए गए हथियारों और फरार होने के साधनों के बारे में फिलहाल पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। पुलिस की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद जांच की दिशा और स्पष्ट हो सकेगी।फिलहाल धनवार यूको बैंक की घटना में सबसे महत्वपूर्ण पहलू लूटी गई संपत्ति का वास्तविक मूल्य और अपराधियों की पहचान है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार नुकसान करोड़ों रुपये में हो सकता है, लेकिन अंतिम आंकड़ा बैंक के रिकॉर्ड की जांच के बाद ही सामने आएगा।
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