मध्य प्रदेश

हरदीप सिंह पुरी की राज्यसभा में एंट्री तय, दो उम्मीदवारों के पर्चे खारिज

Ratna Netam
5 Nov 2026 4:04 PM IST
हरदीप सिंह पुरी की राज्यसभा में एंट्री तय, दो उम्मीदवारों के पर्चे खारिज
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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा उपचुनाव को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी का राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुना जाना सुनिश्चित हो गया है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से उम्मीदवार बनाए गए पुरी के अलावा चुनाव मैदान में उतरे दो अन्य प्रत्याशियों के नामांकन पत्र जांच के दौरान खारिज कर दिए गए। इसके बाद चुनाव में केवल पुरी का नामांकन वैध बचा। पांच नवंबर को नाम वापसी की समयसीमा समाप्त होने के साथ उनके निर्विरोध निर्वाचन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने का रास्ता साफ हो गया। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में निर्वाचन की अंतिम आधिकारिक घोषणा की अलग से पुष्टि नहीं मिली है।
मध्य प्रदेश से राज्यसभा की यह सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट के लिए अनुभवी नेता और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर भरोसा जताया। पार्टी ने 28 अक्टूबर को उनकी उम्मीदवारी की घोषणा की थी। इसके बाद पुरी ने 31 अक्टूबर को भोपाल स्थित विधानसभा परिसर में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।राज्यसभा उपचुनाव की प्रक्रिया के दौरान कुल तीन उम्मीदवार मैदान में थे। भाजपा प्रत्याशी हरदीप सिंह पुरी के अलावा कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार राजकुमार लोहानी और कांते सायन्ना ने भी नामांकन दाखिल किया था। हालांकि, तीन नवंबर को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चों में आवश्यक दस्तावेजों और जानकारियों से जुड़ी कमियां पाई गईं। निर्वाचन अधिकारी ने नियमानुसार दोनों नामांकन पत्र निरस्त कर दिए।
कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार राजकुमार लोहानी का नामांकन अनिवार्य फॉर्म-26 का हलफनामा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जमा नहीं किए जाने के कारण खारिज हुआ। वहीं, कांते सायन्ना के नामांकन में प्रस्तावकों से संबंधित आवश्यक औपचारिकताओं की कमी पाई गई। दोनों उम्मीदवारों के नामांकन निरस्त होने के बाद पुरी अकेले वैध उम्मीदवार रह गए।इस चुनाव में राजनीतिक विवाद भी देखने को मिला। कांग्रेस ने हरदीप सिंह पुरी के नामांकन पत्र और उनके साथ प्रस्तुत हलफनामे को लेकर कई आपत्तियां दर्ज कराई थीं। मध्य प्रदेश विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने नामांकन दस्तावेजों की वैधता पर सवाल उठाए। कांग्रेस का आरोप था कि हलफनामे में कुछ जानकारियां निर्धारित प्रारूप के अनुरूप नहीं दी गई हैं।कांग्रेस नेताओं ने विशेष रूप से फॉर्म-26 में संपत्ति संबंधी विवरण, विदेशी मुद्रा में दर्शाई गई संपत्तियों और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। पार्टी ने इन कथित कमियों को आधार बनाकर पुरी का नामांकन खारिज करने की मांग की थी।
हालांकि, निर्वाचन अधिकारी उमेश कुमार शर्मा ने सभी पक्षों की दलीलों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच करने के बाद आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने पाया कि पुरी के नामांकन में ऐसी कोई महत्वपूर्ण कानूनी कमी नहीं है, जिसके आधार पर नामांकन पत्र को निरस्त किया जा सके।निर्वाचन अधिकारी ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के तहत नामांकन पत्रों की जांच की और हरदीप सिंह पुरी के सभी तीन नामांकन पत्रों को वैध घोषित किया। इस फैसले के बाद कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार सहित अन्य प्रत्याशियों के नामांकन निरस्त होने से मुकाबले की स्थिति समाप्त हो गई।कांग्रेस ने निर्वाचन अधिकारी के फैसले पर असहमति व्यक्त की है। उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे और कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने फैसले को न्यायालय में चुनौती देने की बात कही। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनके द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए था। हालांकि, निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रस्तुत आपत्तियों के आधार पर पुरी का नामांकन खारिज करने का कोई वैधानिक कारण नहीं पाया गया।
हरदीप सिंह पुरी का राज्यसभा में बने रहना केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी के लिए राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनका मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होने वाला था। ऐसे में मध्य प्रदेश से उन्हें उम्मीदवार बनाए जाने के बाद संसद के उच्च सदन में उनकी सदस्यता जारी रहने का रास्ता खुल गया है।पुरी भारतीय विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी भी रह चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, विदेश नीति और प्रशासनिक मामलों में उनका लंबा अनुभव रहा है। राजनीति में आने से पहले उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण राजनयिक पदों पर कार्य किया। बाद में भारतीय जनता पार्टी से जुड़कर उन्होंने संसदीय राजनीति में अपनी भूमिका मजबूत की।वर्ष 2018 में हरदीप सिंह पुरी पहली बार राज्यसभा के सदस्य बने थे। इसके बाद 2020 में भी उन्हें उच्च सदन के लिए चुना गया। केंद्र सरकार में उन्होंने शहरी विकास, आवास और पेट्रोलियम जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की जिम्मेदारियां संभाली हैं।
मध्य प्रदेश से उनकी उम्मीदवारी को भाजपा की व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। राज्य विधानसभा में भाजपा का स्पष्ट बहुमत है। ऐसे में यदि अन्य प्रत्याशियों के नामांकन वैध रहते और मतदान की नौबत आती, तब भी संख्याबल के आधार पर पार्टी की स्थिति मजबूत मानी जा रही थी। अब दोनों अन्य प्रत्याशियों के नामांकन निरस्त होने से मतदान की आवश्यकता ही नहीं रह गई।राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया के अनुसार, निर्धारित समयसीमा के बाद केवल एक वैध उम्मीदवार बचने की स्थिति में निर्वाचन अधिकारी उसे निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर सकते हैं। इस उपचुनाव के लिए पांच नवंबर को दोपहर तीन बजे नाम वापसी की अंतिम समयसीमा निर्धारित की गई थी, जबकि आवश्यकता पड़ने पर मतदान 12 नवंबर को होना था।हरदीप सिंह पुरी की निर्विरोध जीत का रास्ता साफ होने के साथ मध्य प्रदेश की यह राज्यसभा सीट एक बार फिर भाजपा के खाते में बनी रहने की स्थिति में है। दूसरी ओर, नामांकन जांच को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों ने चुनावी प्रक्रिया को राजनीतिक चर्चा का विषय बना दिया है। अब इस प्रकरण में कांग्रेस के संभावित न्यायिक कदम पर भी नजर रहेगी।
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