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सड़क बीमार बच्ची को चटाई पर ले गए अस्पताल
सिमडेगा: झारखंड के सिमडेगा जिले से बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। सड़क नहीं होने के कारण बीमार 14 वर्षीय सुषमा को परिजन कथित तौर पर चटाई में लिटाकर अस्पताल तक ले जाने को मजबूर हुए। दुर्गम रास्ते से किशोरी को इस तरह अस्पताल पहुंचाने की घटना सामने आने के बाद ग्रामीण क्षेत्र में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
मामला सिमडेगा जिले के एक ग्रामीण इलाके का बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक 14 वर्षीय सुषमा की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। हालत को देखते हुए परिवार ने उसे अस्पताल ले जाने का फैसला किया, लेकिन गांव तक चार पहिया वाहन या एंबुलेंस पहुंचने लायक सड़क नहीं होने से परिजनों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई। परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों ने किशोरी को चटाई पर लिटाया और उसे उठाकर पैदल ही ऐसे स्थान तक ले गए, जहां से आगे अस्पताल पहुंचने के लिए वाहन की व्यवस्था हो सकती थी। इस दौरान ग्रामीणों को ऊबड़-खाबड़ और दुर्गम रास्ते से गुजरना पड़ा। बीमार बच्ची को चटाई पर ले जाने की तस्वीर ने स्थानीय स्तर पर लोगों का ध्यान खींचा है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या नई नहीं है। लंबे समय से गांव तक बेहतर सड़क बनाने की मांग की जा रही है। बारिश के दिनों में परेशानी और बढ़ जाती है। कच्चे और खराब रास्तों के कारण कई बार बाइक और दूसरे छोटे वाहनों से भी आवाजाही मुश्किल हो जाती है।
सबसे बड़ी परेशानी मेडिकल इमरजेंसी के दौरान सामने आती है। सड़क नहीं होने पर एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती और मरीजों को मुख्य सड़क तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को पारंपरिक साधनों का सहारा लेना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए ऐसी स्थिति ज्यादा जोखिम पैदा कर सकती है। 14 वर्षीय सुषमा की घटना के बाद स्थानीय लोग प्रशासन से गांव तक सड़क निर्माण कराने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बन जाने से केवल अस्पताल तक पहुंच आसान नहीं होगी, बल्कि बच्चों को स्कूल जाने, किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने और रोजमर्रा के कामों के लिए आने-जाने में भी सुविधा होगी।
हालांकि गांव में सड़क निर्माण को लेकर पहले कोई योजना स्वीकृत हुई थी या नहीं और काम किन कारणों से नहीं हो पाया, इसकी आधिकारिक जानकारी की पुष्टि जरूरी है। इसी तरह सुषमा की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति को लेकर भी संबंधित स्वास्थ्य विभाग या प्रशासन की आधिकारिक जानकारी सामने आने का इंतजार है।
घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच केवल अस्पताल और एंबुलेंस उपलब्ध कराने से सुनिश्चित नहीं होती। मरीज तक एंबुलेंस पहुंचने के लिए सड़क जैसी बुनियादी सुविधा भी उतनी ही जरूरी है। फिलहाल सुषमा को चटाई पर अस्पताल ले जाने की घटना के बाद ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग दोहराई है। अब नजर स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया और क्षेत्र में सड़क सुविधा बेहतर करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर है।
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