झारखंड

श्रावणी मेले में AI आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम

Saba Naaz
4 July 2026 8:50 PM IST
श्रावणी मेले में AI आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम
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Jharkhand: राजकीय श्रावणी मेला 2026 को लेकर देवघर में बिहार और झारखंड के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों की उच्चस्तरीय अंतरराज्यीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। यह बैठक देवघर सर्किट हाउस में संताल परगना के आयुक्त संजय कुमार की अध्यक्षता में हुई, जिसमें मेले को सुरक्षित, सुगम और बेहतर तरीके से आयोजित करने को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई।

बैठक में दोनों राज्यों के सीमावर्ती जिलों के बीच सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और आपदा प्रबंधन को लेकर संयुक्त कार्ययोजना पर सहमति बनी। अधिकारियों ने बताया कि इस बार सुल्तानगंज से देवघर और बासुकीनाथ तक पूरे कांवरिया पथ को एक “सिंगल यूनिट” के रूप में संचालित किया जाएगा, ताकि किसी भी स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। इस बार श्रावणी मेले की सबसे बड़ी खासियत पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का उपयोग होगा। इसके जरिए पूरे कांवरिया मार्ग की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके साथ ही 24 घंटे सक्रिय रहने वाले व्हाट्सएप आधारित सूचना नेटवर्क को भी लागू किया जाएगा, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सूचना और कार्रवाई संभव होगी।

देवघर के उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया ने स्पष्ट किया कि मेले के दौरान किसी भी प्रकार की VIP या आउट ऑफ टर्न दर्शन की सुविधा नहीं दी जाएगी। सभी श्रद्धालुओं को केवल सामान्य कतार के माध्यम से ही बाबा बैद्यनाथ का जलार्पण करना होगा। साथ ही भीड़ नियंत्रण के लिए डबल डेकर वाहनों और छत पर यात्रा पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा बिहार-झारखंड सीमा पर सख्त चेकिंग अभियान चलाया जाएगा और नियम तोड़ने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 24 घंटे रेस्क्यू टीम तैनात रहेगी।

भीड़ प्रबंधन के लिए कई स्थानों पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त टेंट सिटी और होल्डिंग पॉइंट बनाए गए हैं, जहां बिजली, पानी, शौचालय, स्नानागार, मोबाइल चार्जिंग और मेडिकल कैंप जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। भागलपुर प्रमंडल के आयुक्त प्रेम सिंह मीणा ने बताया कि बिहार और झारखंड के सात जिलों—भागलपुर, बांका, मुंगेर, जमुई, देवघर, दुमका और गोड्डा—के बीच लगातार सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाएगा। सभी सीमावर्ती थानों को अलर्ट मोड में रखा जाएगा और 24 घंटे गश्ती की जाएगी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिसमें श्रद्धालुओं को अपने साथ पहचान और संपर्क जानकारी रखने के लिए प्रेरित किया जाएगा ताकि भीड़ में खोने की स्थिति में उन्हें आसानी से परिजनों से मिलाया जा सके। अधिकारियों ने कहा कि इस बार का श्रावणी मेला तकनीक, सुरक्षा और व्यवस्था के लिहाज से अब तक का सबसे आधुनिक आयोजन होगा। AI और डिजिटल नेटवर्किंग के इस्तेमाल से पूरी व्यवस्था को और अधिक मजबूत और प्रभावी बनाया जाएगा।

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