
Jharkhand: गुमला जिले के डीएवी पब्लिक स्कूल की 11 वर्षीय छात्रा आरोही खंडेलवाल ने अपनी असाधारण प्रतिभा से सभी को प्रभावित किया है। कम उम्र में ही उन्होंने अपनी तीसरी किताब ‘हर कहानी एक शिक्षा’ लिखकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें ‘एपीजे अब्दुल कलाम अवॉर्ड 2026’ सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सम्मान मिल चुके हैं।
आरोही खंडेलवाल गुमला निवासी रूपेश खंडेलवाल और सीमा खंडेलवाल की पुत्री हैं। उन्होंने मात्र 8 वर्ष की उम्र से ही लेखन की शुरुआत कर दी थी। पढ़ाई के साथ-साथ वह रोजाना 2 से 3 घंटे रचनात्मक लेखन को देती हैं। अब तक वे तीन किताबें लिख चुकी हैं और चौथी किताब पर भी काम कर रही हैं।
उनकी किताबों की खासियत यह है कि उनमें सरल भाषा में नैतिक शिक्षा और समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश शामिल होते हैं। बच्चों के लिए लिखी गई उनकी कहानियां जीवन मूल्यों को समझाने का प्रयास करती हैं, जिसे पाठकों द्वारा काफी सराहा गया है।
आरोही को उनकी उपलब्धियों के लिए ‘रेडिएंट बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ के तहत अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान और ‘मैजिक बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ जैसे सम्मान भी मिल चुके हैं। स्कूल स्तर पर भी उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया है।
डीएवी पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या ने वंदना सभा के दौरान आरोही को सम्मानित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि आरोही ने न केवल स्कूल का, बल्कि पूरे गुमला और झारखंड का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।
आरोही के माता-पिता ने भी अपनी बेटी की इस सफलता पर गर्व जताते हुए कहा कि यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि अगर मेहनत और लगन हो तो उम्र कोई बाधा नहीं होती।
फिलहाल आरोही अपनी चौथी पुस्तक पर काम कर रही हैं और उम्मीद की जा रही है कि वह आगे भी साहित्य के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएंगी।





