झारखंड

जगन्नाथ मंदिर में हुआ विशेष अनुष्ठान, 108 कलशों से हुआ स्नान

Saba Naaz
29 Jun 2026 7:16 PM IST
जगन्नाथ मंदिर में हुआ विशेष अनुष्ठान, 108 कलशों से हुआ स्नान
x

सरायकेला-खरसावां: सरायकेला-खरसावां जिले के हरिभंजा स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में सोमवार को देवस्नान पूर्णिमा का पर्व अगाध श्रद्धा, आस्था और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा और सुदर्शन (चतुर्धा विग्रह) का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 108 कलशों के पवित्र जल से भव्य महास्नान कराया गया। स्नान मंडप में पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना, हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। महास्नान के दौरान पूरा मंदिर परिसर श्रद्धालुओं द्वारा लगाए गए “जय जगन्नाथ” के जयघोष, शंखध्वनि और पारंपरिक उलुध्वनि से गुंजायमान हो उठा।

वैदिक परंपरा और नियमों के तहत हुआ पवित्र स्नान

देवस्नान पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर के सेवायतों ने चतुर्धा विग्रह को मुख्य रत्न सिंहासन से सादर उठाकर भव्य स्नान मंडप तक पहुंचाया। इसके बाद निर्धारित परंपरा के अनुसार, भगवान जगन्नाथ को 35 कलश, भगवान बलभद्र को 42 कलश, देवी सुभद्रा को 20 कलश तथा सुदर्शन को 11 कलश पवित्र और सुगंधित जल से स्नान कराया गया। इस महास्नान प्रक्रिया के दौरान विग्रहों को अगुरु, चंदन, गाय का शुद्ध घी, दूध, दही, मधु (शहद) और हल्दी का लेप भी अर्पित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुए इस दुर्लभ और अलौकिक अनुष्ठान के साक्षी बनने के लिए भोर से ही मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा था।

अस्वस्थ हुए भगवान, आज से शुरू हुआ 15 दिनों का अनासर काल

धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा के इस अत्यधिक शीतल महास्नान के बाद भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अस्वस्थ (बीमार) हो जाते हैं। यही वजह है कि इस अनुष्ठान के तुरंत बाद उन्हें उपचार और विश्राम के लिए गुप्त 'अणवसर' (अनासर गृह) में विराजमान करा दिया गया है। आगामी 15 दिनों तक भगवान यहीं रहेंगे, जहाँ मंदिर के विशेष सेवायतों द्वारा देशी जड़ी-बूटियों और पारंपरिक गुप्त औषधियों (काढ़े) से उनकी सेवा-चिकित्सा की जाएगी। इस अनासर काल के दौरान भगवान जनसाधारण को दर्शन नहीं देंगे। मंदिर के कपाट बंद रहेंगे, हालांकि अंदरूनी हिस्से में पारंपरिक पूजा-पाठ गुप्त रूप से जारी रहेगी।

14 जुलाई को नवयौवन दर्शन और 16 जुलाई को निकलेगी भव्य रथयात्रा

15 दिनों के इस एकांत उपचार और अनासर काल के समाप्त होने के बाद, आगामी 14 जुलाई को 'नेत्रोत्सव' के पावन दिन महाप्रभु पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने भक्तों के सामने आएंगे। इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के अत्यंत मनमोहक 'नवयौवन स्वरूप' के दर्शन श्रद्धालुओं को मिलेंगे, जिसका भक्तों को वर्ष भर इंतजार रहता है। इसके ठीक दो दिन बाद, यानी 16 जुलाई को विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा महोत्सव का आयोजन होगा। इस दिन भगवान अपने भव्य रथ पर सवार होकर अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर/मौसीबाड़ी) के लिए प्रस्थान करेंगे। हरिभंजा के इस भव्य धार्मिक आयोजन को लेकर पूरे सरायकेला-खरसावां क्षेत्र के श्रद्धालुओं और मंदिर प्रशासन में अभी से भारी उत्साह देखा जा रहा है।

Next Story