
रांची: झारखंड के ग्रामीण इलाकों में हर घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने की योजना को गति देने के लिए राज्य सरकार ने अपनी कवायद बेहद तेज कर दी है। केंद्र सरकार से जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत लंबित पड़ी 6,500 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि हासिल करने के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग इस समय युद्ध स्तर पर काम कर रहा है। विभाग द्वारा केंद्र सरकार के ‘एसएनए स्पर्श पोर्टल’ (SNA Sparsh Portal) पर उन सभी चालू और पूरी हो चुकी ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं का विस्तृत विवरण अपलोड किया जा रहा है, जिनमें राज्य सरकार अपने कोटे की राशि (राज्यांश) पहले ही खर्च कर चुकी है। इसके साथ ही उपयोगिता और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी पोर्टल पर लॉक किए जा रहे हैं।
दिल्ली में एमओयू के बाद बनी थी सहमति
इस पूरी प्रशासनिक तेजी की पृष्ठभूमि हाल ही में नई दिल्ली में तैयार हुई थी। बीते 2 जून को नई दिल्ली में ‘जल जीवन मिशन 2.0’ को लेकर केंद्र और झारखंड सरकार के बीच एक उच्चस्तरीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के सामने वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए राज्य की लगभग 6,500 करोड़ रुपये की लंबित केंद्रीय सहायता राशि को जल्द जारी करने का आग्रह किया था। केंद्रीय अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि एनओसी और अन्य प्रक्रियाओं में पूरा सहयोग किया जाएगा, बशर्ते राज्य सरकार निर्धारित मानकों और अपने हिस्से की 50 प्रतिशत राज्यांश हिस्सेदारी का कड़ाई से पालन करे।
एमओयू की कड़ी शर्त के कारण शुरू हुआ मिशन मोड
जल शक्ति मंत्रालय के नियमों और एमओयू की शर्तों के मुताबिक, केंद्र सरकार से फंड की अगली किस्त पाने के लिए झारखंड को पहले अपने हिस्से की मैचिंग ग्रांट को धरातल पर खर्च करके दिखाना अनिवार्य है। दिल्ली में हुए एमओयू के करीब एक महीना बीतने को है, लेकिन एसएनए स्पर्श पोर्टल पर झारखंड का पूरा तकनीकी डेटा और एनओसी समय पर लॉक नहीं होने के कारण केंद्र से राशि जारी होने में देरी हो रही थी। इस तकनीकी अड़चन को गंभीरता से लेते हुए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के आलाधिकारियों ने पूरी प्रक्रिया को फास्ट-ट्रैक मोड पर डाल दिया है, ताकि राशि सीधे राज्य के खाते में आ सके।
जेजेएम 2.0 में मिला 2,500 करोड़ का विशेष बोनस
झारखंड सरकार इस मेगा मिशन के तहत दिसंबर 2028 तक राज्य के शत-प्रतिशत ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचाने के ऐतिहासिक लक्ष्य को लेकर काम कर रही है। राज्य के पठारी और कठिन भौगोलिक इलाकों को देखते हुए ‘जेजेएम 2.0’ के तहत केंद्र सरकार ने झारखंड को 2,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त विशेष आवंटन (बोनस फंड) भी मंजूर किया है। विभाग का प्रयास है कि इस महीने के अंत तक सभी तकनीकी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएं ताकि फंड रिलीज होते ही निर्माण कार्य की गति को दोगुना किया जा सके।
बजटीय रुकावट नहीं आने दी जाएगी: विभागीय मंत्री
मामले की जानकारी देते हुए झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि जेजेएम 2.0 को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच एमओयू की सभी आधिकारिक प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी हैं। हमारी सरकार केंद्रांश की बड़ी राशि को समय पर प्राप्त करने के लिए अनिवार्य तकनीकी और कागजी प्रक्रियाएं पूरी करने में जुटी है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे दिन-रात काम करके स्पर्श पोर्टल पर डेटा फीडिंग पूरी करें, ताकि ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को बिना किसी बजटीय रुकावट के तेजी से पूरा किया जा सके।





