झारखंड

Latehar में जंगली भैंस के हमले से 2 महिलाओं की मौत

Gulabi Jagat
21 April 2026 8:13 PM IST
Latehar में जंगली भैंस के हमले से 2 महिलाओं की मौत
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Latehar, लातेहार: लातेहार जिले के खिपादोहर पश्चिम वन क्षेत्र में पलामू बाघ अभ्यारण्य के अंतर्गत गुरिकाराम वन में महुआ तोड़ रही महिलाओं पर एक जंगली भैंस ने हमला कर दिया। इस घटना में दो महिलाओं की मौत हो गई। मृतकों की पहचान सिलमानिया देवी और शांति कुमारी के रूप में हुई है। दोनों मोरवाई गांव की निवासी थीं। घटना के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। मृतकों के परिजनों को तत्काल 50,000 रुपये का मुआवजा दिया गया।

दरअसल, सोमवार की सुबह गांव की कुछ महिलाएं गांव से थोड़ी दूर स्थित जंगल में महुआ तोड़ने गई थीं। इसी दौरान जंगल में अचानक जंगली भैंसों के झुंड ने दो महिलाओं पर हमला कर दिया। एक जंगली भैंस ने दोनों महिलाओं को नोंच-नोंच कर मार डाला। सोमवार की शाम तक जब महिलाएं घर नहीं लौटीं, तो परिवार वाले चिंतित हो गए और उन्हें ढूंढने जंगल गए। काफी खोजबीन के बाद भी महिलाओं का पता नहीं चला। जब रिश्तेदार मौके पर पहुंचे तब तक दोनों महिलाओं की मौत हो चुकी थी।

सूचना मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे।

घटना की सूचना मिलने पर मंगलवार को वन विभाग की टीम और स्थानीय जन प्रतिनिधि गांव पहुंचे और पूरी घटना की जानकारी ली। इस संबंध में मुखिया आशीष सिंह चेरो ने बताया कि दोनों महिलाएं महुआ तोड़ने जंगल गई थीं। तभी एक जंगली भैंस ने उन पर हमला कर दोनों को मार डाला। उन्होंने बताया कि वन विभाग से मुआवजे की मांग की जा रही है।

इस संबंध में वन अधिकारी रजनीश कुमार ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है। दोनों महिलाओं के शवों को पोस्टमार्टम के लिए लातेहार सदर अस्पताल भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि मृतकों के परिजनों को सरकारी प्रावधानों के तहत मुआवजा दिया जाएगा। दोनों परिवारों को तत्काल 50,000 रुपये का मुआवजा दिया जा रहा है। शेष राशि कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दी जाएगी।

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इस संबंध में वनपाल रजनीश कुमार ने आम जनता से अपील की है कि वे जंगल में कभी भी अकेले या दो लोगों के साथ न जाएं। जंगल में केवल सुबह के समय ही जाएं। सूरज निकलने के बाद ही जंगल में जाना सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि यदि आप जंगल में महुआ या लकड़ी तोड़ना चाहते हैं तो ग्रामीणों को साथ जाना चाहिए और उजाला होते ही वापस आ जाना चाहिए।

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