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करोड़ों की लागत वाला भवन बदहाली की भेंट चढ़ा
हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग में सरकारी योजनाओं की धीमी रफ्तार और लापरवाही की तस्वीर सामने आई है। अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के लिए बनाया जा रहा छात्रावास 17 साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है। करीब 1 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुई यह योजना अब अधूरे भवन और बदहाल स्थिति के कारण सवालों के घेरे में है।
जिस छात्रावास का निर्माण जरूरतमंद और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को बेहतर आवास सुविधा देने के उद्देश्य से किया गया था, वह आज उपयोग में आने के बजाय खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। वर्षों से बंद पड़े भवन में अब जंगली झाड़ियां उग आई हैं और इसकी हालत लगातार खराब होती जा रही है।
छात्रों को नहीं मिल सका योजना का लाभ
हजारीबाग के खिरगांव क्षेत्र में अल्पसंख्यक छात्रों के लिए छात्रावास निर्माण की शुरुआत की गई थी। इसका उद्देश्य दूर-दराज से पढ़ाई करने आने वाले विद्यार्थियों को रहने की सुविधा उपलब्ध कराना था, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र भी बेहतर माहौल में अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। लेकिन निर्माण कार्य अधूरा रह जाने के कारण छात्रावास का लाभ आज तक छात्रों को नहीं मिल पाया। मजबूरी में कई विद्यार्थियों को निजी लॉज और किराये के कमरों में रहकर पढ़ाई करनी पड़ रही है, जिससे उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
करोड़ों की योजना पर उठे सवाल
सरकारी योजनाओं में समय पर काम पूरा नहीं होने से जनता को मिलने वाली सुविधाएं प्रभावित होती हैं। हजारीबाग का यह छात्रावास भी इसी तरह की लापरवाही का उदाहरण बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण पूरा कर दिया जाता तो बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को इसका फायदा मिलता। वहीं, लंबे समय तक भवन खाली रहने से इसकी सुरक्षा और रखरखाव पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अधूरा भवन बना परेशानी का कारण
स्थानीय लोगों के मुताबिक, लंबे समय से बंद पड़े इस भवन की हालत खराब हो चुकी है। आसपास के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि या तो जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूरा कराया जाए या फिर भवन की सुरक्षा और उपयोग को लेकर ठोस फैसला लिया जाए। लोगों का कहना है कि शिक्षा के उद्देश्य से बनाई गई सरकारी संपत्ति का इस तरह बेकार पड़े रहना चिंता का विषय है। समय पर ध्यान नहीं दिया गया तो भवन पूरी तरह जर्जर हो सकता है।
प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद
अब स्थानीय लोगों और छात्रों की नजर प्रशासन की ओर है। मांग की जा रही है कि अधूरे पड़े छात्रावास की समीक्षा कर जल्द निर्माण पूरा कराया जाए, ताकि विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके। सरकारी धन से तैयार की जा रही योजनाओं की नियमित निगरानी और समय पर पूरा करना जरूरी है, ताकि उनका वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सके। हजारीबाग का यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि योजना बनाने के साथ-साथ उसके क्रियान्वयन और रखरखाव पर भी ध्यान देना कितना जरूरी है।
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