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उत्तराखंड में ANPR नेटवर्क बढ़ाने की तैयारी तेज
देहरादून: उत्तराखंड में वाहनों की निगरानी व्यवस्था को और हाईटेक बनाने की तैयारी की जा रही है। राज्य में लगाए जा रहे ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों को राज्य कर विभाग, पुलिस समेत कई अन्य विभागों से जोड़ा जाएगा। इसके लिए एक मजबूत डाटा स्टोरेज सिस्टम तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
ANPR कैमरे आधुनिक तकनीक पर आधारित होते हैं, जो चलते हुए वाहनों की नंबर प्लेट को स्वतः पहचान कर उसका रिकॉर्ड तैयार करते हैं। इन कैमरों के जरिए वाहन की जानकारी को संबंधित विभागों के डाटा से मिलान किया जा सकता है, जिससे नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई आसान हो जाती है।
कई विभागों के बीच होगा डाटा साझा
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ANPR कैमरों से मिलने वाले डाटा को पुलिस, राज्य कर विभाग और अन्य संबंधित विभागों के साथ साझा किया जाएगा। इससे चोरी के वाहन, संदिग्ध गतिविधियों और टैक्स से जुड़े मामलों की पहचान में मदद मिलने की उम्मीद है। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि अलग-अलग विभागों में मौजूद वाहन संबंधी जानकारियों को एक प्लेटफॉर्म पर लाया जाए, ताकि निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया तेज हो सके।
डाटा स्टोरेज के लिए तैयार होगा विशेष सिस्टम
ANPR कैमरों से बड़ी मात्रा में डाटा प्राप्त होगा, इसलिए इसके सुरक्षित संग्रहण और प्रबंधन के लिए विशेष डाटा स्टोरेज व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसमें कैमरों से मिलने वाली जानकारी को सुरक्षित तरीके से संरक्षित करने और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल करने की योजना है।
अधिकारियों के अनुसार, तकनीक आधारित निगरानी से सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और अपराध नियंत्रण में भी सहायता मिलेगी।
ट्रैफिक और अपराध नियंत्रण में मिलेगी मदद
ANPR तकनीक का इस्तेमाल दुनियाभर में वाहन पहचान, कानून प्रवर्तन और सुरक्षा व्यवस्था के लिए किया जाता है। कैमरे वाहन की नंबर प्लेट पढ़कर रिकॉर्ड तैयार करते हैं और जरूरत पड़ने पर संदिग्ध वाहनों की पहचान में मदद करते हैं। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में यह व्यवस्था विशेष रूप से उपयोगी मानी जा रही है, क्योंकि यहां पर्यटन सीजन में बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों से वाहन आते हैं। बेहतर निगरानी से यातायात प्रबंधन और सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलेगी।
डिजिटल निगरानी की दिशा में बड़ा कदम
राज्य में ANPR कैमरों को विभागों से जोड़ने की योजना को डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा और वाहन संबंधी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी। आने वाले समय में उत्तराखंड में यह तकनीक सड़क सुरक्षा, अपराध नियंत्रण और प्रशासनिक निगरानी को और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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