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जम्मू और कश्मीर
भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता, 2013 कानून के अनुसार मुआवज़ा: Rana
Ratna Netam
5 April 2026 5:23 PM IST

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Jammu.जम्मू: जम्मू-कश्मीर सरकार ने स्पष्ट किया है कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में ज़मीन का मुआवज़ा लैंड एक्ट 2013 के प्रावधानों के अनुसार ही तय किया जाएगा। यह जानकारी वरिष्ठ नेता जावेद राणा ने दी। उन्होंने कहा कि सरकार प्रभावित लोगों को उचित और न्यायसंगत मुआवज़ा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
जावेद राणा ने बताया कि Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013 के तहत मुआवज़ा तय करने की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ लागू की जा रही है। इस कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन लोगों की ज़मीन विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जाती है, उन्हें उनकी संपत्ति के बदले उचित मूल्य मिले।
उन्होंने कहा कि मुआवज़ा तय करते समय जमीन का बाजार मूल्य, क्षेत्र की स्थिति, और अन्य सामाजिक-आर्थिक पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। इसके साथ ही, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और आजीविका को भी प्राथमिकता दी जाती है।
सरकार का कहना है कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए सख्त दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या देरी न हो और सभी मामलों का समय पर निपटारा किया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि लैंड एक्ट 2013 देश में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को अधिक न्यायसंगत और संतुलित बनाता है। इससे पहले के कानूनों की तुलना में यह अधिनियम प्रभावित लोगों को बेहतर मुआवज़ा और पुनर्वास सुविधाएं प्रदान करता है।
स्थानीय नागरिकों और भूमि मालिकों ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यदि मुआवज़ा पारदर्शी तरीके से और सही समय पर दिया जाए, तो विकास परियोजनाओं के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ेगा।
हालांकि, कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि मुआवज़ा प्रक्रिया को और सरल और तेज बनाया जाना चाहिए, ताकि प्रभावित परिवारों को जल्द राहत मिल सके।
जावेद राणा ने आश्वासन दिया कि सरकार विकास कार्यों और लोगों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखेगी। उन्होंने कहा कि सभी प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है।
कुल मिलाकर, जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा लैंड एक्ट 2013 के अनुसार ज़मीन का मुआवज़ा तय करने का निर्णय पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी, बल्कि प्रभावित लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।
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