जम्मू और कश्मीर

जम्मू-कश्मीर में डॉक्टरों की कमी पर CAG रिपोर्ट में चिंता

Ratna Netam
5 April 2026 4:34 PM IST
जम्मू-कश्मीर में डॉक्टरों की कमी पर CAG रिपोर्ट में चिंता
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Jammu.जम्मू: सुप्रीम ऑडिट संस्थान (CAG) की ताज़ा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक है। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश में औसतन 2,461 लोगों पर केवल एक डॉक्टर उपलब्ध है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित मानक से काफी कम है।
CAG की रिपोर्ट में स्वास्थ्य ढांचे, अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की क्षमता की समीक्षा की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि कई ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या बेहद कम है, जिससे जनता को समय पर और पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएँ नहीं मिल पा रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों की कमी के कारण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक अस्पतालों में मरीजों को लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। गंभीर और आपातकालीन मामलों में यह स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। CAG ने अधिकारियों से कहा है कि स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना और पर्याप्त डॉक्टरों की तैनाती सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डॉक्टरों की कमी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और जन स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को स्थानीय युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की तैनाती के लिए विशेष योजनाएँ लागू करनी चाहिए।
स्थानीय नागरिकों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ काफी कमजोर हैं। उन्होंने बताया कि अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और लंबी दूरी की वजह से उन्हें जीवन और स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
सरकार ने आश्वासन दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए नए डॉक्टरों की भर्ती और स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग इस रिपोर्ट के निष्कर्षों को गंभीरता से ले रहा है और सुधारात्मक कदम उठाने की प्रक्रिया में है।
कुल मिलाकर, CAG की रिपोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर कमी को उजागर किया है। 2,461 लोगों पर एक डॉक्टर की अनुपात अत्यधिक चिंता का विषय है। यह स्थिति न केवल स्थानीय जनता के लिए चुनौती है, बल्कि प्रशासन के लिए भी प्राथमिकता बन गई है। विशेषज्ञ और नागरिक दोनों ने सरकार से मांग की है कि स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया जाए और पर्याप्त चिकित्सक तैनात किए जाएँ, ताकि सभी नागरिकों को समय पर और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएँ मिल सकें।
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