जम्मू और कश्मीर

जम्मू के RS पुरा सेक्टर में पारंपरिक तांगों की वापसी, ईंधन बचत अभियान से बढ़ा उपयोग

Kavita2
18 May 2026 10:11 AM IST
जम्मू के RS पुरा सेक्टर में पारंपरिक तांगों की वापसी, ईंधन बचत अभियान से बढ़ा उपयोग
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Jammu जम्मू: जम्मू-कश्मीर के आरएस पुरा सेक्टर में पारंपरिक तांगों (घोड़ा-गाड़ी) का उपयोग एक बार फिर बढ़ने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की अपील और पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के प्रयासों के बीच स्थानीय स्तर पर लोग वैकल्पिक और पारंपरिक परिवहन साधनों की ओर रुख कर रहे हैं।

आरएस पुरा सेक्टर में देखे जा रहे ये तांगे ऐतिहासिक रूप से क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं। बताया जाता है कि आज़ादी से पहले जम्मू और सियालकोट के बीच यात्रियों को ले जाने के लिए घोड़ा-गाड़ियों का व्यापक उपयोग होता था। समय के साथ आधुनिक वाहनों के आने से इनका उपयोग काफी कम हो गया था, लेकिन अब एक बार फिर यह परंपरा धीरे-धीरे लौटती दिखाई दे रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कुछ समय से तांगों से यात्रा करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां छोटी दूरी की यात्रा करनी होती है, लोग अब तांगे को एक सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प मान रहे हैं।

यह बदलाव ऐसे समय में देखने को मिल रहा है जब देशभर में ईंधन बचाने और पारंपरिक परिवहन साधनों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। विभिन्न स्तरों पर चल रहे जागरूकता अभियानों के तहत लोगों को पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

आरएस पुरा सेक्टर में मौजूद तांगा संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में उनकी आय में भी सुधार हुआ है, क्योंकि स्थानीय यात्रियों के अलावा कुछ पर्यटक भी इस पारंपरिक सवारी का अनुभव लेने के लिए तांगे का उपयोग कर रहे हैं। इससे न केवल उन्हें आर्थिक लाभ मिल रहा है, बल्कि यह परंपरागत व्यवसाय भी फिर से जीवित हो रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में परिवहन के वैकल्पिक मॉडल को बढ़ावा दे सकती है। हालांकि, वे यह भी कहते हैं कि तांगे जैसे साधन सीमित दूरी और सीमित क्षमता के लिए ही उपयुक्त हैं, लेकिन पर्यावरणीय दृष्टि से ये एक बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं।

स्थानीय प्रशासन भी इस बदलाव पर नजर बनाए हुए है और उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में ईंधन बचत और स्वच्छ परिवहन के उद्देश्य से ऐसे पारंपरिक साधनों को कुछ स्तर पर प्रोत्साहन दिया जा सकता है।

फिलहाल आरएस पुरा सेक्टर में तांगों की बढ़ती मौजूदगी ने एक बार फिर पुराने परिवहन साधनों को चर्चा में ला दिया है और यह बदलाव लोगों के बीच उत्सुकता का विषय बना हुआ है।

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