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अमरनाथ यात्रा में बुजुर्गों का जज्बा, आस्था के आगे उम्र बेअसर

गांदरबल (जम्मू-कश्मीर): मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में समुद्र तल से करीब 9,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित बालटाल बेस कैंप इन दिनों भक्ति, विश्वास और अदम्य साहस का केंद्र बना हुआ है। कठिन पहाड़ी रास्तों, ठंडी हवाओं और चुनौतीपूर्ण मौसम के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
इन श्रद्धालुओं में सबसे ज्यादा प्रेरणा देने वाले वे बुजुर्ग यात्री हैं, जिनकी उम्र 70 से 72 साल के बीच है। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका उत्साह और आस्था युवाओं के लिए मिसाल बन रही है। छड़ी के सहारे, गर्म कपड़ों में लिपटे और कई बार परिजनों या स्वयंसेवकों का हाथ थामकर ये श्रद्धालु कठिन यात्रा पूरी करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
आस्था के आगे उम्र बनी छोटी
अमरनाथ यात्रा को देश की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में से एक माना जाता है। ऊंचाई, कम ऑक्सीजन, ठंड और दुर्गम रास्तों के बावजूद श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए हर साल पहुंचते हैं।
इस बार भी कई बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने साबित किया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और आस्था के सामने शारीरिक परेशानियां भी कमजोर पड़ जाती हैं।
बालटाल बेस कैंप पर मौजूद 70 से अधिक उम्र के कई श्रद्धालुओं का कहना है कि बाबा अमरनाथ के प्रति उनकी श्रद्धा ही उन्हें इस कठिन यात्रा को पूरा करने की ताकत देती है।
राजस्थान के महंत देव की प्रेरणादायक यात्रा
राजस्थान के रहने वाले 70 वर्षीय महंत देव इस यात्रा के दौरान लोगों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। उन्होंने बताया कि बाबा बर्फानी के दर्शन करना उनका कई वर्षों पुराना सपना था।
बालटाल मार्ग पर यात्रा के दौरान उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण परिवार के लोग उनकी चिंता कर रहे थे, लेकिन उन्होंने यात्रा का फैसला नहीं बदला।
उन्होंने कहा, "मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं है और परिवार चिंतित था, लेकिन मैंने कहा कि आस्था वह शक्ति देती है जो दवाइयां नहीं दे सकतीं। बाबा खुद चलने का साहस देते हैं।"
उनके इस विश्वास और हौसले ने आसपास मौजूद अन्य श्रद्धालुओं को भी प्रेरित किया।
कठिन रास्तों पर भी नहीं थमा उत्साह
बालटाल मार्ग अपनी कठिन चढ़ाई और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के लिए जाना जाता है। रास्ते में कई स्थानों पर खड़ी चढ़ाई, पत्थरीले रास्ते और ठंडी हवाओं का सामना करना पड़ता है।
इसके बावजूद बुजुर्ग श्रद्धालु धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं। कई श्रद्धालु छड़ी का सहारा लेते हैं, जबकि कुछ को परिवार के सदस्य या स्वयंसेवक मदद पहुंचाते हैं।
यात्रा मार्ग पर तैनात सुरक्षाकर्मी और सेवा दल भी बुजुर्ग यात्रियों की मदद के लिए लगातार सक्रिय हैं।
सेवा भाव से मदद कर रहे स्वयंसेवक
अमरनाथ यात्रा के दौरान जगह-जगह लंगर, मेडिकल कैंप और सहायता केंद्र लगाए गए हैं। बुजुर्ग श्रद्धालुओं को इन सेवाओं से काफी मदद मिल रही है।
स्वयंसेवक जरूरत पड़ने पर उन्हें आराम, भोजन और स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। प्रशासन की ओर से भी यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
बुजुर्ग श्रद्धालुओं का संदेश
यात्रा में शामिल बुजुर्ग श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान के प्रति विश्वास इंसान को कठिन परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति देता है।
उनका मानना है कि उम्र केवल शरीर की सीमा तय करती है, लेकिन मन और आस्था की कोई सीमा नहीं होती।
कई श्रद्धालुओं ने कहा कि बाबा अमरनाथ के दर्शन के बाद मिलने वाली आध्यात्मिक शांति ही उन्हें इस कठिन यात्रा के लिए प्रेरित करती है।
बालटाल बना आस्था और साहस का प्रतीक
बालटाल बेस कैंप इन दिनों केवल यात्रियों का पड़ाव नहीं, बल्कि आस्था और साहस की कहानियों का केंद्र बन गया है। यहां पहुंचने वाले बुजुर्ग श्रद्धालु यह संदेश दे रहे हैं कि मजबूत इच्छाशक्ति के सामने उम्र और कठिनाइयां बाधा नहीं बन सकतीं।
अमरनाथ यात्रा में शामिल ये बुजुर्ग श्रद्धालु अपनी भक्ति और हिम्मत से हर किसी को प्रेरणा दे रहे हैं। उनकी यात्रा यह साबित करती है कि आस्था इंसान को उन रास्तों पर भी आगे बढ़ने का हौसला देती है, जहां सामान्य परिस्थितियों में चलना भी मुश्किल होता है।





