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कश्मीर में आतंकी भर्ती लगभग खत्म, सुरक्षा हालात में बड़ा बदलाव: Army Chief

Srinagar श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर में पिछले तीन दशकों से जारी आतंकवाद और युवाओं की भर्ती को लेकर सुरक्षा स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार घाटी में स्थानीय स्तर पर आतंकवादी भर्ती लगभग समाप्त हो चुकी है, जिसे सुरक्षा ढांचे में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल ही में कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकी भर्ती “लगभग न के बराबर” रह गई है। यह बयान सुरक्षा एजेंसियों के उस आकलन से मेल खाता है, जिसमें कहा गया है कि 1989 में शुरू हुई उग्रवाद की अवधि के बाद यह पहली बार है जब स्थानीय भर्ती इतनी कम हुई है।
करीब तीन दशकों तक कश्मीर की स्थिति को अक्सर सुरक्षा दृष्टिकोण से देखा जाता रहा है। उस दौरान सरकारें और सुरक्षा एजेंसियां लगातार मिलिटेंट भर्ती पर नजर रखती थीं, जबकि राजनीतिक बहसें भी आतंकवाद और उसके जवाबी कदमों के इर्द-गिर्द केंद्रित रहती थीं।
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, 2016 में हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में आतंकी गतिविधियों और भर्ती में एक बार फिर तेजी देखी गई थी। उस समय कई युवाओं के संगठन से जुड़ने की घटनाएं सामने आई थीं, जिससे सुरक्षा चुनौतियां बढ़ गई थीं।
हालांकि, अब स्थिति में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय युवाओं का आतंकी संगठनों की ओर रुझान काफी कम हो गया है। यह बदलाव उस दौर से बिल्कुल अलग है जब 1990 के दशक की शुरुआत में हजारों युवा सीमा पार प्रशिक्षण लेने या स्थानीय आतंकी संगठनों में शामिल होने के लिए प्रेरित होते थे।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट कई कारणों का परिणाम हो सकती है, जिसमें सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई, विकास कार्यों में बढ़ोतरी और सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में सुधार शामिल हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर के सामाजिक और राजनीतिक माहौल में भी परिवर्तन का संकेत देता है। पहले जहां युवाओं की भागीदारी को सुरक्षा चुनौती के रूप में देखा जाता था, वहीं अब उनका रुझान शिक्षा, रोजगार और विकास की ओर बढ़ता दिख रहा है।
हालांकि, अधिकारियों ने यह भी कहा है कि स्थिति पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और सीमापार से संभावित खतरे अब भी मौजूद हैं। इसलिए सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।
कुल मिलाकर, स्थानीय आतंकी भर्ती में आई यह गिरावट जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखी जा रही है, जो पिछले कई दशकों की तुलना में सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है।





