जम्मू और कश्मीर

पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का छात्र जीवन, बचपन से ही धारा के विपरीत चलने की है आदत

Janta Se Rishta Admin
24 Oct 2021 9:15 AM GMT
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का छात्र जीवन, बचपन से ही धारा के विपरीत चलने की है आदत
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फाइल फोटो 

राजस्थान के झुंझनू में एक कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक यह दावा कर राजनीतिक गलियारों में चर्चा के केंद्र बन गये हैं कि "मेरे कार्यकाल के दौरान मुझसे कहा गया था कि यदि मैं 'अंबानी' और 'आरएसएस से संबद्ध' एक व्यक्ति की दो फाइलों को मंजूरी दे दूं तो मुझे रिश्वत के तौर पर 300 करोड़ रुपये मिलेंगे, लेकिन मैंने सौदों को रद्द कर दिया"। मेघालय के राज्‍यपाल सत्‍यपाल मलिक ने केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के आंदोलन का समर्थन करके भी धारा के विपरीत चलने की अपनी पुरानी छवि दोहराई है और यहां तक ऐलान कर दिया कि यदि किसानों का प्रदर्शन जारी रहा तो वह अपने पद से इस्तीफा देकर उनके साथ खड़े होने के लिए तैयार हैं।

मेरठ कॉलेज से बीएससी और एलएलबी की शिक्षा प्राप्‍त करने वाले सत्‍यपाल मलिक को खरी-खरी कहने की आदत है। पढ़ाई के दिनों में छात्रावास में सत्‍यपाल मलिक के रूम पार्टनर रहे पीजी कॉलेज नानकचंद, मेरठ के अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉक्टर नरेंद्र कुमार पुनिया ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा, "सत्‍यपाल शुद्ध राजनीतिज्ञ हैं और जो बात उनके दिल में आती है, वह कह देते हैं।" बहुत लंबे समय तक मलिक के साथ रहे पुनिया बताते हैं, "वह (सत्‍यपाल मलिक) अपने सिद्धांतों के साथ कभी समझौता नहीं कर सकते और उनमें ईमानदारी कूट-कूट कर भरी है।"

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के हिसावदा गांव में 24 जुलाई, 1946 को सत्‍यपाल मलिक का जन्म हुआ। उनके पिता बुध सिंह किसान थे और सत्‍यपाल जब दो वर्ष के थे तभी पिता का निधन हो गया। पड़ोस के प्राथमिक विद्यालय से उनकी पढ़ाई शुरू हुई और इसके बाद ढिकौली गांव के इंटर कालेज से माध्‍यमिक शिक्षा पूरी कर वह मेरठ कॉलेज पहुंचे। मलिक के मुताबिक जब वह दो साल के थे तो पिता का देहांत हो गया और बाद में वह खुद खेती करके पढ़ने जाते थे। उनकी राजनीतिक रुचि के बारे में पुनिया ने बताया कि डॉक्टर राम मनोहर लोहिया के विचारों से प्रभावित सत्यपाल छात्र राजनीति में सक्रिय हुए और 1968 में मेरठ कॉलेज में छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गये। तेज तर्रार और बिना लाग लपेट अपनी बात कहने वाले सत्‍यपाल मलिक पर भारतीय क्रांति दल के चौधरी चरण सिंह की नजर पड़ी और उन्होंने सत्‍यपाल को राजनीति की मुख्यधारा से जोड़ दिया।

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